जमशेदपुर अपहरण कांड:कारोबारी कैरव गाँधी के अपहरण से लेकर रिहाई तक की पूरी कहानी


टीएनपी डेस्क(TNP DESK):13 जनवरी 2026 यह वही दिन था जिस दिन दोपहर के बाद जमशेदपुर शहर में तहलका मच गया. क्योंकि बात ही कुछ ऐसी हो गईm दअरसल जमशेदपुर के चर्चित उद्यमी देवांग गांधी के पुत्र कैरव गांधी का अपहरण हो गया था. जिसके बाद जमशेदपुर पुलिस अपने मिशन पर निकल पड़ी और चारों तरफ खोजबीन और पता लगाने के लिए पुलिस टीम का गठन किया गया लेकिन अपहरण के 13 दिन बाद तक जमशेदपुर पुलिस को कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था कि आखिर किसने कैरव गांधी का अपहरण किया है और इसके पीछे की वजह आखिर है क्या.आख़िरकार 13 दिन बाद पुलिसकी मेहनत रंग लाई और 27 जनवरी की सुबह 4:30 बजे जमशेदपुर पुलिस ने कैरव गांधी को सकुशल बरामद कर लिया.
13 दिन बाद भी नहीं मिल पाया था कोई सुराग
आपको बता दें कि कैरव गांधी का को हज़ारीबाग बिहार के गया बॉर्डर से बरामद किया गया, पुलिस ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस के दबाव में आकार अपहरणकर्ताओं ने कैरव गांधी को यहा गाड़ी से उतार कर छोड़ दिया और खुद फरार हो गए.27 जनवरी की सुबह यह खबर चारो तरफ आग की तरफ फेल गई कि गाैरव गांधी को सकुशल पुलिस ने बरामद कर लिया है और उनके बिस्टुपुर आवास जाकर उनके परिजनों को सकुशल सौप भी दी दिया गया है, लेकिन लोगों के मन में आज भी यह सवाल घूम रहा है कि आखिर क्यों और कैसे इतने सुरक्षित क्षेत्र से कैरव गांधी को अपहरण कर लिया गया था.पुलिस के पास आज भी इसका जवाब नहीं है.
गांधी के बरामदगी पर परिजनो ने ली थी राहत की सांस
हलाकि एसएसपी पीयूष पांडे ने पीसी कर जानकारी दी थी कि सकुशल कैरव गांधी को बरामद कर लिया गया है उनको हज़ारीबाग़ बिहार बॉर्डर पर अपहरणकर्ताओं ने गाड़ी से उतार दिया और फ़रार हो गए. पुलिस का कहना है कि पुलिसया दबाव में आकर अपहरणकर्ताओं ने शायद ऐसा किया है लेकिन फिर भी सटीक जबाव आज भी पुलिस नहीं दे पा रही है.वही पुलिस का दावा है कि जल्दी ही अपहरणकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया जाएगा जांच तेजी से चल रही है.
पढ़े 13 जनवरी को क्या और कैसा हुआ था
13 जनवरी की सुबह 11:30 बजे कैरव गांधी अपनी कार लेकर बिस्टुपुर के लिए निकले और घर पर कहा था कि वह पहले एसबीआई बैंक जाएंगे, इसके बाद आदित्यपुर स्थित अपनी कंपनी जाएंगे .वही कंपनी से वह सीधे दोपहर में 3:00 बजे के करीब खाना खाने के लिए घर आएंगे लेकिन जब दो-तीन बजे तक उनका कोई अता पता नहीं चला वह घर नहीं पहुंचे और उनका फोन भी स्विच ऑफ आया तो परिजनों को उनकी चिंता होने लगी और कुछ अनहोनी का एहसास हुआ जिसके बाद पुलिस में मामला दर्ज कराया गया.मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की लेकिन 13 दिन तक उनका कोई अता पता नहीं चल पाया वहीं उसके बाद परिजनों का खून सुख गया जब उन्हें फिरौती का कॉल आया.
10 करोड़ तक की मांगी गई थी फिरौती
जब परिजनों ने पुलिस ने मामला दर्ज करा दिया वहीं उसके कुछ देर के बाद परिजनों को एक विदेशी नंबर से फोन आया जिसमे 5 करोड़ की फिरौती मांगी गई.कॉल के बाद एक बात परिजनों ने जान लिया कि उनके बेटा का अपहरण हुआ है.वही बढ़ते-बढ़ते फिरौती की रकम 10 करोड़ तक पहुंच गई. जिसके बाद पुलिस ने 7 एसआईटी टीम का गठन किया जो झारखंड के साथ बिहार ओडिशा और बंगाल में भी अपनी जांच कर रही थी.धीरे-धीरे जांच आगे बढ़ती गई लेकिन कोई भी सुराग पुलिस को नहीं मिल पाया. फिर 27 जनवरी 2026 को अचानक अपहरणकर्ताओं ने खुद हज़ारीबाग़ बिहार बॉर्डर के पास लाकर कैरव गांधी को छोड़ दिया जिसके बाद पुलिस उन्हें सुरक्षित उनके घर पहुंचा पाई.
डीजीपी तदाशा मिश्रा भी जमशेदपुर पहुंची थी
आपको बता दें कि कैरव गांधी के बारामदगी से 2 दिन पहले खुद झारखंड की पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा जमशेदपुर पहुंची थी.और कैरव गांधी के अपहरण के मामले में कार्रवाई और जांच की प्रगति की जानकारी ली थी.वही दो दिन बाद कैरव गांधी को सकुशल बरामद किया गया. जिसके बाद पुरे शहर के लोगों ने राहत की सांस ली.वही जमशेदपुर के नामी गिरामी लोग भी कैरव गांधी के घर पहुंचने लगे और बधाई दी.वहीं कैरव गांधी और उनके पिता ने भी अपने घर के बालकनी से हाथ जोड़कर पुलिस के साथ मीडिया का भी शुक्रिया किया.जब मीडिया की ओर से सवाल पूछा गया कि वो कुछ कहना चाहते है तो उन लोगों ने कहा कुछ नहीं बोलना चाहते सब बढ़िया है.
अब तक एक भी आरोपी को नहीं पकड़ पाई है पुलिस
फिलहाल कैरव गांधी सशक्त घर पहुंच चुके है लेकिन फिर भी एक भी आरोपी पुलिस के हाथो नहीं चढ़ पाया है ना ही पुलिस को इससे संबंधित कोई भी सबूत मिल पाया है हालांकी एसएसपी ने जांच की बात कही है तो वही अब देखने वाली बात होगी कि कैरव गांधी के अपहरण के पीछे क्या मकसद था और किसका हाथ था.
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