जैनियों ने पकड़ा आंदोलन की राह, केंद्र और राज्य सरकारों के खिलाफ है गुस्सा, जानिए पूर्व में बिहार सरकार की कार्रवाई के बाद फिर क्यों चर्चे में पार्श्वनाथ 

    जैनियों ने पकड़ा आंदोलन की राह, केंद्र और राज्य सरकारों के खिलाफ है गुस्सा, जानिए पूर्व में बिहार सरकार की कार्रवाई के बाद फिर क्यों चर्चे में पार्श्वनाथ 

    धनबाद(DHANBAD): झारखंड के गिरिडीह के जैन समाज के पवित्र तीर्थ स्थल श्री सम्मेद शिखरजी को पर्यटन स्थल घोषित करने के खिलाफ नए साल में आंदोलन तेज हो गया है .रविवार को दिल्ली में जैन समाज के लोगों ने इंडिया गेट पर विशाल प्रदर्शन किया .उनका आंदोलन आगे और भी तेज होगा. पार्श्वनाथ पर्वत यानी श्री सम्मेद शिखर इस बार विवाद को लेकर चर्चा में है .पूर्व में दिगंबर और श्वेतांबर के बीच कानूनी लड़ाई के साथ बिहार सरकार द्वारा संपूर्ण पर्वत के अधिग्रहण को लेकर जारी अध्यादेश को लेकर यह सुर्खियों में आया था. इस बार झारखंड सरकार के साथ केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र के विकास को लेकर जो अधिसूचना जारी की है, उसमें पर्यटन शब्द के इस्तेमाल किए जाने पर जैन समाज नाराज है .झारखंड सरकार ने पार्श्वनाथ के विकास को लेकर पार्श्वनाथ पर्यटन विकास प्राधिकार का गठन किया है. वही, पार्श्वनाथ के वन्य प्राणी  आ श्रयणी क्षेत्र में इको टूरिज्म को लेकर केंद्र सरकार ने भी अधिसूचना जारी की है .जैन समाज का कहना है कि इन दोनों ही अधिसूचना में पर्यटन शब्द का उपयोग किया गया है. जिसे हटाना जरूरी है. जैनियों के लिए पारसनाथ पर्वत अत्यंत ही पवित्र और पूजनीय है. इस पर्वत पर जैनियों के 24 तीर्थंकर में से 20 ने तपस्या की है और मोक्ष प्राप्त किया है .देखना है सरकार अपनी अधिसूचना से पर्यटन शब्द को हटाती है अथवा यह विवाद और तेज होता है.

    रिपोर्ट: सत्यभूषण सिंह, धनबाद 


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