है न दिलचस्प मामला:जमीन  पर तबेला लेकिन मालिकाना हक़ को लेकर दो सरकारी विभागों में कैसे खींच गई है तलवारें,पढ़िए

    है न दिलचस्प मामला:जमीन  पर तबेला लेकिन मालिकाना हक़ को लेकर दो सरकारी विभागों में कैसे खींच गई है तलवारें,पढ़िए

    धनबाद(DHANBAD): अभी तो यहां तबेला चल रहा है. लेकिन तबेले की  इस जमीन को लेकर अब राज्य सरकार और केंद्र सरकार की दो एजेंसियां आपस में मालिकाना हक को लेकर टकरा सकती है.यह जमीन दोनों विभागों के लिए प्रतिष्ठामूलक बन सकती है. यह हम इसलिए कह रहे हैं कि धनबाद के पूजा टॉकीज के पास एक जमीन के हिस्से को लेकर जिला परिषद और रेलवे आमने-सामने हो गए हैं .दोनों सरकारी एजेंसियों ने एक ही जमीन पर काम के लिए अलग-अलग टेंडर प्रकाशित किया है. रेलवे ने जमीन पर रेल कोच रेस्टोरेंट बनाने के लिए टेंडर मांगा है .तो जिला परिषद ने जमीन की चाहरदीवारी  का टेंडर फ्लोट किया है. बताया जाता है कि रेलवे ने दक्षिणी छोर पर कोच रेस्टोरेंट की सफलता से उत्साहित है.इसलिए टेंडर आमंत्रित किया है. 

    इसके लिए ई ऑक्शन के जरिए 13 जून को बोली लगेगी. धनबाद रेलवे स्टेशन के दक्षिणी छोर पर खुले कोच रेस्टोरेंट की सफलता के बाद रेलवे पूजा टॉकीज के पास कोच रेस्टोरेंट खोलना के दिशा में आगे बढ़ गया है. अब जिला परिषद ने इस जमीन पर अपना दावा ठोक कर मामले को उलझा दिया है. इसी जमीन की घेराबंदी के लिए जिला परिषद ने भी टेंडर निकाल दिया है. जिला परिषद का भी काम होगा या नहीं, इसमें अभी संदेह है. रेलवे और जिला परिषद ने जिस जमीन पर दावा ठोका है. उस पर फिलहाल तबेला चल रहा है. जमीन पर तीन तरफ से रेलवे की बाउंड्री है. सड़क की तरफ भी टूटी-फूटी कम ऊंचाई वाली चहारदीवारी है.  

    लोग बताते हैं कि जिला परिषद ने 2015 में जमीन पर दुकान बनाने का प्रयास किया था.इसके लिए जमीन पर शिलान्यास भी किया गया था. वहां लगे शीला पट्ट पद पर पूर्व सांसद पीएन सिंह, विधायक राज सिंहा और पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष रॉबिन गोराई के नाम दर्ज हैं. दुकानों की नींव रखने के बाद ही रेलवे ने जमीन को अपना बता दिया था. रेलवे ने जिला परिषद को पत्र भी लिखा था. दोनों विभागों ने जमीन की माफी भी कराई थी. लेकिन कोई निर्णय नहीं निकला. खैर, जो भी हो लेकिन अब मामला दिलचस्प इसलिए हो गया है कि दोनों विभागों ने अपने-अपने कार्यों के लिए टेंडर निकाल दिया है. अब देखना होगा कि किसके दावे में कितना दम है. जिला परिषद बाउंड्री  का निर्माण करा पाती है अथवा रेलवे कोच रेस्टोरेंट बना पाता है. यह सवाल धीरे-धीरे बड़ा होता जा रहा है.

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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