झारखंड की राजनीतिक दुनिया में किसी के चेहरे हुए फीके तो किसी पर चढ़ा दुगुना रंग, पढ़ें इस साल होली पर उपराजधानी में नेता मिलेंगे गले या बढ़ेगी दूरियां   

    झारखंड की राजनीतिक दुनिया में किसी के चेहरे हुए फीके तो किसी पर चढ़ा दुगुना रंग, पढ़ें इस साल होली पर उपराजधानी में नेता मिलेंगे गले या बढ़ेगी दूरियां   

    दुमका(DUMKA):रंगों और उमंगों का पर्व होली का उत्साह इस बार दुमका में कुछ अलग ही दिख रहा है वजह भी साफ है इसबार के होली के बाद चुनाव का शोरगुल शुरू होने वाला है तो जाहिर है इस बार होली में राजनीति के रंग और व्यंग ने दुमका का मूड कुछ अलग ही होलियाना कर दिया है. होली एक ऐसा पर्व जिसका इंतजार बेसब्री से लोग करते हैं. इसे एक उत्सव के रूप में मनाया जाता है, तभी तो होली को रंगोत्सव भी कहते हैं. झारखंड की उपराजधानी दुमका होली के रंग में रंगने लगा है. सड़क किनारे होली का बाजार सज गया है.लोग जमकर खरीददारी कर रहे हैं.प्रशासनिक स्तर पर भी शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में होली सम्पन्न हो इसकी मुकम्मल व्यवस्था की गई है.

    पढ़ें कैसी होगी इस साल की चुनावी होली

    इस सबके बीच एक सवाल उभरता है कि इस वर्ष दुमका के नेताओं की होली कैसी होगी. चुनावी वर्ष में तमाम दलों के नेताओं ने अपने अपने ढंग से होली की तौयारी की थी, लेकिन बदले राजनीतिक माहौल में कुछ नेताओं के चेहरे का रंग फीका कर दिया है, तो किसी के चेहरे की चमक को दुगुना कर दिया है.   

    दुमका में कांग्रेस ना ज्यादा उत्साहित नजर आती है और ना ज्यादा नाराज

       कथित जमीन घोटाला मामले में झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष एवं पूर्व सीएम हेमंत सोरेन के जेल जाने के कारण झामुमो ने होली नहीं मनाने का निर्णय लिया है. जब हेमंत सोरेन जेल से निकलेंगे तो झामुमो कार्यकर्ता होली और दीवाली साथ साथ मनाएंगे. रही सही कसर दिसोम गुरु शीबू सोरेन की बड़ी बहू सीता सोरेन ने कमल की सवारी कर पूरा कर दिया.अगर बात कांग्रेस की करें तो दुमका में कांग्रेस ना ज्यादा उत्साहित नजर आती है और ना ज्यादा नाराज.पार्टी की उम्मीद की किरण मंत्री बादल पत्रलेख अपने आप को होली से दूर रखते हैं.इसके पीछे भी खास वजह है.पार्टी तो बस यही मानती है.. "कोयैहूं नृप हो हमें का हानी".  

    चुनावी वर्ष में सबसे ज्यादा रोचक होली बीजेपी की होने वाली है

      चुनावी वर्ष में सबसे ज्यादा रोचक होली बीजेपी की होने वाली है. वर्ष 2019 के चुनाव में दिसोम गुरु शीबू सोरेन को पराजित कर संसद भवन पहुंचने वाले सुनील सोरेन को एक बार फिर भाजपा ने प्रत्यासी बनाया है. दुमका में गुटबाजी से जूझ रही बीजेपी के कार्यकर्ताओं में कहीं खुसी कहीं गम का माहौल देखा गया, लेकिन शीबू सोरेन की बड़ी बहू सीता सोरेन के भाजपा में शामिल होते ही माहौल बदल गया. कमल पर सवार सीता सोरेन को दुमका लोक सभा से बीजेपी प्रत्यासी बनाये जाने की चर्चा जोरों पर है. इस चर्चा ने किसी के चेहरे के रंग को बदरंग कर दिया है तो किसी के चेहरे की चमक को दुगुना कर दिया है.इसकी वजह भी साफ है. पार्टी के अंदर कई चेहरे ऐसे हैं जो लोक सभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे लेकिन पार्टी द्वारा सिम्बल सुनील सोरेन को दिया गया है.  

    दिलचस्प होगी इस साल की होली

      देखना दिलचस्प होगा कि कमल पर सवार होकर सीता सोरेन जब पहली बार दुमका की धरती पर कदम रखेगी तो बीजेपी के समर्पित कार्यकर्ता किस रूप में उनका स्वागत करेंगे.अगर सीता सोरेन पार्टी का सिम्बल लेकर दुमका पहुचीं तो नजारा क्या होगा? हमारा मकशद किसी की भावना को ठेस पहुंचाने का नहीं है तभी तो कहते हैं कि बुरा ना मानो होली है.   

    रिपोर्ट-पंचम झा                                                        


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