पाकुड़(PAKUR):पाकुड़ जिले के महेशपुर प्रखंड स्थित चांदपुर गांव में शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है.यहां उत्क्रमित मध्य विद्यालय तीन ओर से पत्थर खदानों से घिरा हुआ है, जबकि स्कूल के सामने से ओवरलोड डंपरों का लगातार आवागमन होता है. ऐसे में छोटे-छोटे बच्चे हर दिन जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचने को मजबूर है.विद्यालय परिसर में चारदीवारी नहीं होने से बच्चों पर हर समय हादसे का खतरा मंडराता रहता है. एक तरफ तेज रफ्तार डंपरों की सड़क है तो दूसरी ओर खुले खदान.खदानों में होने वाली ब्लास्टिंग, उड़ती धूल और डंपरों के शोर के बीच बच्चों की पढ़ाई चल रही है.ग्रामीणों और शिक्षकों का कहना है कि भारी वाहनों से उड़ने वाली धूल बच्चों के मध्याह्न भोजन तक पहुंच जाती है.
स्कूल परिसर और कक्षाओं में भी धूल की मोटी परत
स्कूल परिसर और कक्षाओं में भी धूल की मोटी परत जमी रहती है, जिससे बच्चों में सांस संबंधी बीमारी का खतरा बढ़ रहा है.विद्यालय के शिक्षक चक्रधर महतो ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार प्रशासन और शिक्षा विभाग को शिकायत दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर शिक्षक हमेशा डर के साए में रहते है.
पेयजल की भी गंभीर समस्या
विद्यालय में पेयजल की भी गंभीर समस्या है.चापाकल खराब रहने के कारण बच्चों और मध्याह्न भोजन बनाने में परेशानी हो रही है.शिक्षक ने बताया कि पिछले वर्ष परीक्षा के दौरान अत्यधिक धूल और शोर की वजह से करीब एक महीने तक गांव के निजी घर में कक्षाएं चलानी पड़ी थीं.ग्रामीणों ने प्रशासन और क्षेत्रीय सांसद से स्कूल की सुरक्षा सुनिश्चित करने, चारदीवारी निर्माण, धूल नियंत्रण और डंपरों की रफ्तार पर रोक लगाने की मांग की है.
रिपोर्ट: विकास कुमार

