एनडीए  3.0 में भ्रष्टाचारियों पर ED की करवाई  तेज या फिर होगी सुस्त , पढ़िए  गठबंधन के दबाव  में  कितना पड़ेगा फर्क

    एनडीए  3.0 में भ्रष्टाचारियों पर ED की करवाई  तेज या फिर होगी सुस्त , पढ़िए  गठबंधन के दबाव  में  कितना पड़ेगा फर्क

    धनबाद(DHANBAD) | केंद्र में एनडीए सरकार ने शपथ ले ली है.  इसके साथ ही सवाल बड़ा हो गया है कि सरकार के शपथ लेने के बाद गठबंधन की वजह से भ्रष्टाचारियों पर ईडी  की कार्रवाई तेज होगी या सुस्त  हो जाएगी?.  क्या गठबंधन के दबाव में ईडी  के कामकाज पर फर्क पड़ेगा?  सवाल इसलिए उठ रहे हैं कि झारखंड सहित कई राज्यों में इसी साल विधानसभा चुनाव भी होने वाले है.  2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के कुल 240 सांसद है.  नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू गठबंधन के बड़े चेहरे के रूप में सामने आए है.  यह  अलग बात है कि गठबंधन की सरकार चलाना बहुत हंसी -ठिठोली  नहीं होती.  इसके लिए बहुत समझौते करने पड़ते है.  यह  अलग बात है कि 1991 में जब नरसिंह राव की सरकार बनी थी, तो कांग्रेस के  पास 244 सांसद थे.  भाजपा के पास अभी 240 सांसद है.  नरसिंह राव ने सफलतापूर्वक सरकार चलाई और ऐसा कभी महसूस नहीं होने दिया कि वह घटक दलों के दबाव में है.  इस बार हालात थोड़े अलग हैं ,लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन चुनौतियों से अनजान नहीं हो सकते.  साझा कार्यक्रम बनाकर सरकार बेहतर ढंग से चला सकते है.  वैसे देश में गठबंधन सरकार चलाने का अपना एक इतिहास रहा है. 

     
    1999 में अटल बिहारी वाजपेई ने 182 सांसदों को लेकर सरकार चलाई थी
     
    1999 में अटल बिहारी वाजपेई ने 182 सांसदों को लेकर सरकार चलाई थी.  इस बार तो सांसदों की संख्या 240 है.  वैसे चुनाव के पहले प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई चर्चे  में रही.  फिलहाल दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जेल में है, तो हेमंत सोरेन को गिरफ्तारी से पहले इस्तीफा देना पड़ा.  वह अभी  जेल में है, विपक्षी दलों का आरोप रहा है कि ईडी  की कार्रवाई विपक्षी दलों पर अधिक की जाती है.  चुन चुन कर उन्हें निशाना बनाया जाता है.  जो लोग भाजपा में शामिल हो जाते हैं, उन पर प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई ढीली हो जाती है या खत्म हो जाती है.  2014 और 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बहुमत की सरकार चलाई है.  उनका कोई भी निर्णय अंतिम होता था.  लेकिन इस बार गठबंधन की सरकार में थोड़ी मजबूरी तो होगी ही.  नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू निश्चित रूप से किसी न किसी योजना के तहत सरकार में शामिल हुए होंगे.  दोनों  विशेष राज्य  का दर्जा लंबे समय से मांग रहे है.  उनके लिए यह  मौका है कि वह अपने प्रदेशों को विशेष राज्य का दर्जा दिला दे.  वैसे, 2024 में विपक्ष भी कमजोर नहीं है.  विपक्ष आक्रामक राजनीति कर रहा है.   मौके की तलाश कर रहा है.  2024 में इंडिया गठबंधन एक जुट होकर चुनाव लड़ा और भाजपा को पूर्ण बहुमत लाने से रोकने में सफल रहा.  विपक्षी पार्टियों ईडी  की कार्रवाई से परेशान रही.  ताबड़तोड़ छापे मारे जाते रहे, गिरफ्तारियां भी हुई.  

    झारखंड में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने है 

    झारखंड में इसी साल के अंत में विधानसभा  का चुनाव होने जा रहा है.  झारखंड में भी ईडी  सक्रिय है.  इतना तो तय है कि गठबंधन की सरकार में ईडी  की कार्रवाई उतनी तेज नहीं रह सकती, क्योंकि सरकार पर भी दबाव रहेगा.  चंद्रबाबू नायडू तो गिरफ्तार भी हुए थे.  उन्हें जेल जाना पड़ा था.  चर्चा है कि नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द  रहने वाले लोगों को भी ईडी  इस निशाने पर लिए हुई थी.  बिहार में लालू प्रसाद यादव का परिवार ईडी  की कार्रवाई से जूझ रहा है.  ऐसे में लोग इस बात की चर्चा कर रहे हैं कि क्या भ्रष्टाचारियों के खिलाफ करवाई शिथिल पड़ेगी या फिर पहले की तरह जारी रहेगी.  झारखंड में तो हर सभा में यह बात उठाई जाती रही कि  हेमंत सोरेन के जेल से छूटने की चाबी आपके पास है.  यानी आपकी वोट की  ताकत से ही हेमंत सोरेन जेल से बाहर आ सकते है.  वैसे चर्चा तो यह भी है कि झारखंड में आलमगीर आलम की गिरफ्तारी के बाद एक- दो और मंत्री ईडी  की रडार पर है.  देखना होगा कि  उनके खिलाफ कार्रवाई आगे बढ़ती है या फिर उन्हें राहत मिलती है.

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो