सोन नदी की 312 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा, अधिकारी नहीं सुलझा पा रहे हैं विवाद  

    सोन नदी की 312 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा, अधिकारी नहीं सुलझा पा रहे हैं विवाद  

    पलामू(PALAMU): हैदरनगर थाना क्षेत्र के कबरा कला गांव के उत्तर दिशा में सोन नदी के किनारे लगभग 312 एकड़ सरकारी जमीन पर दो वर्षों से विवाद चल रहा है. अवैध कब्जा को लेकर एक जाति विशेष मल्लाह और गांव के अन्य लोगों के बीच इस जमीन पर कब्जे को लेकर झड़प भी हो चुकी है. स्थानीय प्रशासन से लेकर जिले के अधिकारी इस विवाद को दो वर्षों में भी नहीं सुलझा पाए हैं. विवाद सुलझने के बजाय और उलझता ही जा रहा है. अब विवाद सुलझाने की जिम्मेवारी उपायुक्त ने प्रशिक्षु आईएएस श्रीकांत विसपुते को सौपा है. प्रशिक्षु आईएएस शनिवार को विवाद सुलझाने कबरा गांव पहुंचे. कबरा कला मध्य विद्यालय परिसर में जमीन विवाद को सुलझाने प्रशिक्षु आईएएस के साथ पूरा प्रशासनिक महकमा पहुंचा. दोनों पक्ष के लोग भी बड़ी संख्या में जुटे.

    शुरू से करते आ रहे हैं खेती

    मल्लाह जाति के लोगों ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि सोन नदी के दियारा क्षेत्र की भूमि पर खेती-बारी करना उनका पुश्तैनी पेशा है. उनका यह भी कहना है कि सोन नदी की दियारा क्षेत्र की पूरी भूमि बिहार सरकार के समय से ही उन्हें मछली पकड़ने और खेती करने के लिए दिया गया है. इधर, दो साल पहले गांव के अन्य जाति के लोग एक साजिश के तहत उन्हें भूमि से बेदखल करने का प्रयास कर रहे हैं.

    जानवर को भी पहुंचाते हैं नुकसान

    दूसरे पक्ष के लोगों ने अधिकारियों के समक्ष बताया कि सोन नदी की भूमि सरकारी भूमि है. जिस पर गांव के सभी लोगों का समान अधिकार है. लेकिन एक जाति विशेष के लोग भूमि को निजी भूमि मानकर दूसरे लोगों को उसका उपयोग नहीं करने देते हैं. अगर जानवर चरते हुए उस जमीन की तरफ चला जाता है तो  जानवरों को भी नुकसान पहुंचाते हैं. जिस कारण गांव में जमीन को लेकर विवाद चल रहा है.  

    बड़े-बुजुर्गों की उपस्थिति में मामले को सुलझा

    दोनों पक्षों की ओर से ग्रामीणों की बात सुनने के बाद प्रशिक्षु आईएएस श्रीकांत विसपुते ने कहा कि जिस जमीन को लेकर ग्रामीण विवाद कर रहे हैं, वह सोन नदी की सरकारी जमीन है. उन्होंने कहा कि नदी की भूमि को बंदोबस्ती भी नहीं की जा सकती है. उन्होंने दोनों पक्षों को आपसी सहमति के आधार पर विवाद सुलझाने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि गांव में ही बड़े-बुजुर्गों की उपस्थिति में मामले को सुलझाने से ही विवाद समाप्त हो सकता है. अन्यथा, यह मामला आगे भी भी जारी रहेगा और दोनों पक्ष अनावश्यक परेशान रहेंगे.

    अधिकारियों ने ग्रामीण के पाले डाला गेंद

    उन्होंने कहा कि आपसी सहमति बनाकर दोनों पक्ष के दो-दो लोग उपायुक्त से मिल सकते हैं.  प्रशिक्षु आईएसएस अधिकारी विसपुते के इस निर्णय पर ग्रामीणों ने चुप्पी साध ली.  अधिकारियों के जाने के बाद ग्रामीणों ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों ने इस विवाद से अपना पल्ला झाड़ लिया और विवाद के गेंद को ग्रामीणों के पाले में ही डाल दिया.  कई ग्रामीणों ने चुटकी लेते हुए कहा कि दो घंटे तक जिस अधिकारी का इंतजार उनलोगों ने किया, वह 20 मिनट में निर्णय उन्हीं पर थोपकर चलते बने.  अगर आपसी सहमति हो ही जाती तो फिर इतना बड़ा विवाद जिले के उच्चाधिकारियों तक कैसे पहुंचती.  

    जमीन के विवाद में मारपीट में कई लोग जा चुके है जेल

    बता दे कि दो वर्ष पहले गैर मल्लाह जाति के कुछ लोगों द्वारा खाली पड़ी जमीन पर जोत-कोड़ का प्रयास किया गया.  जिसका मल्लाहों ने विरोध किया. इस घटना को लेकर दोनों पक्षों में मारपीट भी हुई. पुलिस ने कई लोगों को इस मामले में जेल भी भेजा.  जमीन की मापी भी अंचल द्वारा कराई गई थी जिसे मल्लाहों ने मानने से इंकार कर दिया था.  मामले ने काफी तूल पकड़ा और दोनों पक्षों की ओर से प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई.  अभी भी यह मामला अनुमंडल दंडाधिकारी के न्यायालय में विविध वाद संख्या-510/2020 के अंतर्गत  विचाराधीन है.

    ये अधिकारी रहे उपस्थित

    जमीन विवाद को सुलझाने के लिए उपायुक्त के निर्देश पर प्रशिक्षु आईएएस श्रीकांत विसपुते शनिवार को कबरा कला गांव पहुंचे.विसपुते के साथ हुसैनाबाद के अनुमंडल पदाधिकारी कमलेश्वर नारायण, एसडीपीओ पूज्य प्रकाश,हैदरनगर के अंचल अधिकारी राजीव नीरज एवं थाना प्रभारी अजित कुमार मुंडा भी उपस्थित थे.

    रिपोर्ट:जफ़र हुसैन, पलामू   

     


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