अगर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री अड़े रहे तो धनबाद सहित झारखंड के 150  इंडस्ट्री को इस तरह मिल सकती है "संजीवनी" !

    अगर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री अड़े रहे तो धनबाद सहित झारखंड के 150  इंडस्ट्री को इस तरह मिल सकती है "संजीवनी" !

    धनबाद (DHANBAD) : केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के निर्देश को अगर देश की स्टील उत्पादक कंपनियां अमल में लाई, तो धनबाद सहित झारखंड के उद्योगों का बहुत बड़ा भला हो सकता है. केंद्रीय मंत्री ने सोमवार को सभी स्टील उत्पादकों को घरेलू कोयला उद्योग से हार्ड कोक खरीदने का निर्देश दिया है. यहां तक कहा कि अगर आपूर्ति पर्याप्त नहीं होती है, तभी विदेश से आयात किया जाए. सूत्र बताते हैं कि वाणिज्य मंत्री के निर्णय पर अगर अमल हुआ, तो झारखंड सहित धनबाद में दम तोड़ रहे हार्डकोक  उद्योग को "संजीवनी" मिल सकती है.  

    वाणिज्य मंत्री की पहल की धनबाद में स्वागत 

    वाणिज्य मंत्री की इस पहल का धनबाद के इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बीएन सिंह ने खुले दिल से स्वागत किया है. उन्होंने यह भी बताया कि धनबाद से जुड़े कुछ उद्योग मलिक बैठक में शामिल थे. उद्यमियों ने बताया कि स्टील कंपनियों को स्पष्ट कहा गया है कि घरेलू कोक की खरीद में प्राथमिकता दे. दरअसल, होता यह है कि आयातित कोक के मुकाबले घरेलू कोक प्रतियोगिता में पीछे रह जाते है. नतीजा होता है कि सस्ता पड़ने के कारण विदेश से स्टील उत्पादक कंपनिया  कोक को आयात करती है. यहां यह बताना गलत नहीं होगा कि धनबाद में कभी हार्ड कोक उद्योग की तूती बोलती थी. 

    कोयला संकट की वजह से फिलहाल से फिलहाल संकट में है उद्योग 

    कोयला संकट की वजह से फिलहाल इन पर खतरे के बादल है. स्थानीय हार्ड कोक उद्योग को ना तो कोयला मिल रहा है और नहीं हार्डकोक बेचने के लिए के लिए मार्केट, पिछले कुछ वर्षों से हार्ड कोक उद्योग पर लगातार ताला लटक रहे है. जो चल रहे हैं, वह क्षमता के अनुसार नहीं चल रहे है. हार्डकोक इंडस्ट्रीज को धनबाद में लिंकेज के जरिए हर महीने कभी तीन लाख टन कोयला बीसीसीएल से मिलता था. लेकिन अब उन्हें ऑक्शन से कोयला लेना पड़ता है. 

    धनबाद में ही 150 से अधिक उद्योग तोड़ रहे दम 
     
    कोयले की कमी के कारण कई बार हार्डकोक इंडस्ट्रीज को दूसरे देशों से भी कोयला मंगाना पड़ता है. जो महंगा होता है. इस कारण इसे बेचने में कठिनाई होती है. बताया जाता है कि धनबाद में लगभग डेढ़ सौ हार्डकोके उद्योग स्थापित है. जिनमें आधे से भी कम चल रहे है. वह भी क्षमता के अनुसार नहीं चल रहे है. बता दें कि हार्डकोके  उद्योगों में भारी पूंजी निवेश होता है और यह लगातार प्रक्रिया है. एक बार अगर चिमनी बंद हो जाए तो उसे चालू करने में काफी कोयला लगाना पड़ता है. 
     
    90 के दशक में धनबाद में हार्डकोक उद्योगों की चांदी थी
     
    90 के दशक में धनबाद में हार्डकोक उद्योगों की चांदी थी. लेकिन धीरे-धीरे यह उद्योग व्यवस्था की मार झेलने लगा और आज अपने बुरे दिन में पहुंच गया है. इस उद्योग पर प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष ढंग से दो लाख लोगों का रोजगार जुड़ा है. फिर भी इस उद्योग के प्रति कोई ध्यान नहीं देता. इस उद्योग को कोर सेक्टर में शामिल करने की लगातार मांग की जा रही है, लेकिन ऐसा कभी किया नहीं गया. 

    कोलियरी मलिक के परिवार वालों ने लगाया है उद्योग 
     
    दरअसल, कोलियारियों के राष्ट्रीयकरण के बाद कोलियरी मलिक के परिवार वालों ने अपनी आजीविका के लिए हार्डकोक इंडस्ट्री शुरू की. शुरुआती दिनों में तो उन्हें इसका फायदा मिला, लोग धीरे-धीरे राष्ट्रीयकरण की टीस को भुलने लगे थे. लेकिन फिर एक बार ऐसा समय आया कि उन्हें इस रोजगार से अलग हटकर दूसरा रोजगार ढूंढना पड़ रहा है. अभी भी कई उद्योग मालिक हैं, जो इंडस्ट्री बंद कर बैठे हुए है. अब जब वाणिज्य मंत्री ने भरोसा दिया है तो उन्हें उम्मीद जगी है कि इस उद्योग के दिन फिर वापस आ सकते है. अगर ऐसा हुआ तो धनबाद का तो भला होगा ही झारखंड का भी इससे बहुत भला हो सकता है.

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो  


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