IAS विनय चौबे ने सरकार में रहते करोड़ों की संपत्ति अर्जित की, नोएडा गुरुग्राम में बड़ा निवेश, ACB कर सकती है जब्त


रांची (RANCHI) : निलंबित आईएएस अधिकारी विनय चौबे से जुड़े आय से अधिक संपत्ति मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे भ्रष्टाचार की परतें भी खुलती जा रही हैं. जेल में बंद विनय चौबे और उनके करीबी लोगों के खिलाफ चल रही जांच में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को ऐसे अहम सबूत मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि यह कथित भ्रष्टाचार सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका जाल हरियाणा के गुरुग्राम तक फैला हुआ है.
दस्तावेजों, रजिस्ट्री रिकॉर्ड और पैसों के लेन-देन की बारीकी से जांच के बाद ACB ने खुलासा किया है कि गुरुग्राम के प्राइम इलाकों में करोड़ों रुपये की अचल संपत्तियां विनय चौबे के करीबी रिश्तेदारों के नाम पर खरीदी गईं. जांच में यह भी सामने आया है कि इन संपत्तियों को बेनामी तरीके से खड़ा करने के लिए पारिवारिक रिश्तों का सहारा लिया गया. जांच एजेंसी के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क में विनय चौबे के बहनोई शिपिज त्रिवेदी की भूमिका बेहद अहम रही है. आरोप है कि अवैध धन को वैध बनाने और उसे रियल एस्टेट में लगाने के लिए शिपिज त्रिवेदी को मुख्य माध्यम बनाया गया. जांच में गुरुग्राम की एआर बिल्डर्स का नाम भी प्रमुखता से सामने आया है, जहां करीब एक करोड़ रुपये कीमत का एक आवासीय फ्लैट शिपिज त्रिवेदी और प्रियंका त्रिवेदी के नाम पर रजिस्टर्ड पाया गया.
ACB का कहना है कि इस संपत्ति की खरीद के लिए भुगतान की व्यवस्था इस तरह की गई थी कि पैसों के असली स्रोत तक पहुंचना मुश्किल हो जाए. जांचकर्ताओं को शक है कि पारिवारिक संबंधों की आड़ में काले धन को सुरक्षित निवेश में बदला गया. इतना ही नहीं, गुरुग्राम के AIPL ऑटोग्राफ प्रोजेक्ट में मौजूद करीब एक करोड़ रुपये की एक यूनिट भी जांच के दायरे में है. यह यूनिट ‘ट्राइब ट्रस्ट कंपनी’ के नाम पर बुक कराई गई थी. शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि इस ट्रस्ट का इस्तेमाल किसी सामाजिक काम के लिए नहीं, बल्कि असली मालिकाना हक और नियंत्रण छिपाने के लिए किया गया. कागजों में संपत्ति भले ही ट्रस्ट के नाम हो, लेकिन कथित तौर पर इसका कंट्रोल उसी पारिवारिक समूह के पास था, जिससे विनय चौबे जुड़े बताए जा रहे हैं.
न्यू गुरुग्राम स्थित स्पेस टावर की एक महंगी कमर्शियल प्रॉपर्टी भी जांच एजेंसियों के रडार पर आ चुकी है. रिकॉर्ड्स से पता चलता है कि इस संपत्ति को पहले अलग-अलग संरचनाओं के जरिए रखा गया और बाद में रणनीति के तहत शिपिज त्रिवेदी के नाम ट्रांसफर कर दिया गया. जांच एजेंसियों का मानना है कि शिपिज त्रिवेदी सिर्फ नाम के संपत्ति धारक नहीं हैं, बल्कि कथित तौर पर काले धन को घुमाने वाली पूरी चेन की एक अहम कड़ी हैं. गुरुग्राम का रियल एस्टेट सेक्टर इस अवैध कमाई को ठिकाने लगाने के लिए सुरक्षित ठिकाने की तरह इस्तेमाल किया गया. फिलहाल ACB और अन्य जांच एजेंसियां इन सभी संपत्तियों को कुर्क करने की तैयारी में जुटी हैं और मनी ट्रेल के आखिरी सिरे तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं. यह पूरा मामला नौकरशाही में गहराई तक फैले भ्रष्टाचार के एक और गंभीर चेहरे को सामने ला रहा है.
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