भूख ने ली जान ! सात महीने से राशन नहीं मिलने का आरोप , सिस्टम पर उठे सवाल

    भूख ने ली जान ! सात महीने से राशन नहीं मिलने का आरोप , सिस्टम पर उठे सवाल

    टीएनपी डेस्क(Tnp desk):-आज अगर किसी की जान भूख से चली जाती है, तो बेहद ही शर्मिंदा करने वाला बात होगी . क्योकि, अगर किसी की जिंदगी खाना नहीं मिलने से खत्म हो जाए तो इससे बडा गुनाह क्या हो सकता है. जब हिन्दुस्तान की तरक्की की गाथा चांद तक पहुंच गई है और आज इंसान को पेटभर भोजन नहीं मिली और उसकी मौत हो जाए तो लाजमी है कि एक सवाल खड़ा होता है. झारखड के गढ़वा के डंडई प्रखंड कार्यालय के पास रह रहे मुसहर परिवार के लोगों को पिछले 7 महीनों से राशन नहीं मिला है. उनके सामने अब भुखमरी की नौबत आ गई है. बुधवार को 50 वर्षीय सुरेश मुसहर की मौत भूख जनित (starved to death) बीमारी (भोजन न मिलने के कारण) से होने का मामला सामने आया है.

    सात महीने से नहीं मिला राशन

    मृतक के परिवार वालों ने आरोप लगाया कि सात महीने से राशन नहीं मिल रहा है. घर के सदस्य जिनके नाम शंकर मुसहर, उमेश मुसहर, दिनेश मुसहर, महेंद्र मुसहर आदि ने बताया कि उनके सामने भूखमरी की हालत पैदा हो गई है. पिछले सात माहीने से राशन नहीं मिल रहा है. गांव देहात में सुखाड़ की नौबत से भीख भी नहीं मिलती है. समय पर खाना नहीं मिलने के कारण सुरेश कमजोर हो गया था, जिसके चलते उसकी मौत (starved to death) हो गई. इधर, डंडई के बीडीओ चोनाराम हेंब्रम ने बताया कि सुरेश मुसहर की मौत कैसे हुई है, इसकी जांच की जा रही है.

    सरकारी अनाज नहीं मिलने से गरीब परेशान

    झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी ग्रीन कार्ड राशन योजना पूरी तरह से बेकार हो चुकी है. आठ महीने से गरीबों को अनाज नहीं मिला है. वर्तमान में   राज्य में गरीबों को फरवरी माह का राशन मिल रहा है. राज्य के 485806 ग्रीन कार्डधारी गरीब परिवार के लोग सरकारी अनाज नहीं मिलने के चलते संकट के स्थिति पैदा हो गई है. एफसीआई गोदाम से ग्रीन राशन कार्ड धारकों के लिए अनाज ही नहीं मिल रहा है. राज्य सरकार आवंटन ही नहीं दे रही है. जिसके चलते थक-हार कर कार्डधारी घर लौट जा रहें हैं.

     


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