ऐसे में कैसे पढ़ेंगे बच्चे ? सरकारी स्कूल में पढ़ रहे लगभग पांच लाख बच्चों को नहीं मिली किताबें

    ऐसे में कैसे पढ़ेंगे बच्चे ? सरकारी स्कूल में पढ़ रहे लगभग पांच लाख बच्चों को नहीं मिली किताबें

    टीएनपी डेस्क (Tnp desk):-झारखंड के सराकरी स्कूलों में पढ़ रहें पांच लाख बच्चे ऐसे है जिन्हें अभी तक किताबे नहीं मिली है. स्कूली शिक्षा औऱ साक्षरता विभाग के बार-बार निर्देश के बाद भी राज्य में सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों को किताब नहीं मिला है. इनमे सभी क्लास के बच्चे शामिल है. इससे अंदाजा लग सकता है कि शिक्षा का क्या हाल होगा और बच्चे किस तरह बिना किताबों के पढ़ रहे होंगे औऱ अपनी तकदीर संवार रहें होगे. ई-विद्यावाहिनी पर उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक  पुस्तकों के वितरण में गढ़वा, गिरिडीह, रांची, बोकारो औऱ पूर्वी सिंहभूम पीछे हैं .शुक्रवार को सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों औऱ जिला शिक्षा अधीक्षकों के साथ हुई समीक्षा बैठक में यह बात सामने आई .

    डेढ़ हजार सीटें खाली

    राज्य परियोजना निदेशक किरण कुमारी पासी ने हर हाल में इस माह तक शत-प्रतिशत बच्चों को पाठ्यपुस्तकें मुहैया कराने का निर्देश दिया है. वैसे , अधिकारियों का कहना था कि रिपोर्ट अपडेट नहीं होने से यह आंकड़ा दिख रहा है. ज्यादातर बच्चों को पाठ्यपुस्तकें मिल गई हैं औऱ बैठक में उत्कृष्ट विद्यालयों में नामांकन और वहां उपलब्ध कराए जा रहे आवश्यक संसाधनों की भी समीक्षा हुई. ये भी बात इस बैठक में सामने आई कि  कुछ जिलों के स्कूलों में अभी भी लगभग डेढ़ हजार सीटें खाली रह गई . सभी ज्यादा रिक्त रांची के स्कूलों में हैं. वही, दूसरे औऱ तीसरे नंबर पर  चतरा और खूंटी हैं. वही दूसरी तरफ, लोहरदगा , रामगढ़ औऱ सिमडेगा में शत-प्रतिशत सीटों पर एडमिशन हुआ है. राज्य परियोजना निदेशक ने सभी विद्यालयों में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने, शिक्षकों के रिक्त पदों पर दूसरे विद्यालयों के अंग्रेजी में निपुण शिक्षकों को प्रतिनियुक्त करने के निर्देश दिए है. बैठक में यह बात सामने आई कि कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों में लक्ष्य के विरुद्ध 82 प्रतिशत और  झारखंड बालिका आवासीय विद्यालयों मं 76 प्रतिशत नामांकन हुआ

    पदाधिकारियों से जवाब-तलब

    इस  बैठक में सभी जिला पदाधिकारियों से जवाब तलब किया गया. बैठक में मिड डे मिल,  जेसीईआरटी, झारखंड एकेडमिक काउंसिल की गतिविधियों की भी समीक्षा हुई. साथ ही शिक्षकों के ट्रांसफर को लेकर निर्धारित प्रक्रियाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए गए. सरप्लस शिक्षकों की सूची में त्रूटि को दूर करने के भी निर्देश दिए गए.


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