झारखंड में रघुवर की वापसी से कितना मजबूत होगा भाजपा, जानिए अंदर खाने में क्या है तैयारी

    झारखंड में रघुवर की वापसी से कितना मजबूत होगा भाजपा, जानिए अंदर खाने में क्या है तैयारी

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK): झारखंड विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद से सुस्त पड़ी भाजपा में मानो दो दिनों से नई जान आ गई है. तमाम भाजपाई नेताओं और कार्यकर्ताओं के मन में यह भावना जाग रही होगी कि, "रघुवर तेरी राह निहारे सातों जनम से भाजपा". आपको बता दें कि ओडिशा के राज्यपाल और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने 24 दिसंबर की रात ओडिशा के राज्यपाल की पद से इस्तीफा दे दिया था. फिलहाल रघुवर दास की झारखंड में वापसी हो गई है. तमाम भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया है. मौके पर रांची विधायक सीपी सिंह, आदित्य साहू समेत कई नेता मौजूद थे. खबर है कि रघुवर दास 27 दिसंबर को बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उन्हें पार्टी संगठन में कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है. लेकिन इन सबके बीच यह सवाल उठ रहा है कि रघुवर दास की वापसी के बाद झारखंड में विपक्ष की गद्दी पर बैठी भाजपा को मजबूती मिलेगी.

    भाजपा के लिए फायदेमंद हो सकती है रघुवर दास कि वापसी 

    आपकों बता दें कि रघुवर दास का राजनीतिक अनुभव और उनके संगठन में पकड़ पार्टी के लिए फायदेमंद हो सकता है. झारखंड में फिलहाल भाजपा विपक्ष में है और साफ तौर पर पार्टी के अंदर नेतृत्व का संकट देखा जा रहा है. रघुवर दास की वापसी से भाजपा को एक मजबूत नेतृत्व मिल सकता है, जो हेमंत सोरेन की सरकार को प्रभावी चुनौती देने में सक्षम हो. इसके साथ ही आपकों बता दें कि रघुवर दास के राज्यपाल से इस्तिफे दिए जाने के खबर से तमाम जमीनी कार्यकर्ताओं में एक नया उत्साह देखा जा रहा है. इसके साथ ही कई कार्यकर्ता उनकी वापसी को पार्टी के लिए नई शुरूआत मान रहे है. फिलहाल इंतजार रघुवर दास की वापसी का है उनकी वापसी के बाद ही साफ तौर पर पता चलेगा कि दास कि वापसी से भाजपा को कितनी मजबूती मिलती है.

    भाजपा के अंदर चल रहे खींचतान को कैसे दूर करेंगे रघुवर दास

    जानकारों का मानना है कि रघुवर दास की वापसी से पार्टी को निश्चित रूप से फायदा होगा, लेकिन यह देखना होगा कि वे पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को कितनी कुशलता से संभालते हैं. इसके साथ ही एक सवाल यह भी है कि भाजपा में ही बाबूलाल मरांडी  के समर्थक सोच में पड़ गए है. बाबूलाल के समर्थकों में अंदर ही अंदर बवाल मचा हुआ है. सबका यहीं सवाल है कि बाबूलाल मरांडी को कहां जगह मिलेगी, इसके अलावा चंपाई सोरेन को कहां शिफ्ट किया जाएगा. अब देखना यह है कि उनकी सक्रियता से झारखंड की राजनीति और भाजपा के अंदर चल रहे खींचतान को कैसे दूर करते है.

    2023 में अक्टूबर में राज्यपाल बनाए गए थे रघुवर दास

    झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास को पार्टी ने सक्रिय राजनीति से अलग करते हुए पिछले साल अक्टूबर में उन्हें पड़ोसी राज्य उड़ीसा का राज्यपाल नियुक्त किया था. राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा थी कि रघुवर दास को झारखंड की राजनीति से दूर रखा गया है. ताकि विधानसभा चुनाव में बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में पार्टी चुनाव लड़ सके. विधानसभा चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन निराशाजनक रहा. परिणाम के बाद संगठन को तंदुरुस्त करने के लिहाज से सांगठनिक कार्यक्रम तय किए गए हैं. फरवरी 2025 तक प्रदेश भाजपा को नया अध्यक्ष मिल जाएगा. राज्यपाल पद से इस्पाफ देने के बाद यह संभावना जताई जा रही है की रघुवर दास फिर से भाजपा में शामिल होकर प्रदेश में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

    झारखंड की राजनीति में भाजपा का एक बड़ा ओबीसी चेहरा रहे हैं रघुवर दास

    रघुवर दास झारखंड बीजेपी के अध्यक्ष रह चुके हैं राज्य के उपमुख्यमंत्री का पद भी संभाल चुके हैं भाजपा नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. इन सबसे अलग रघुवर दास झारखंड में पार्टी के लिए ओबीसी समाज का बड़ा चेहरा रहे हैं. हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में ओबीसी चेहरा का संकट पार्टी को झेलना पड़ा है. पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व भी इस चीज को अब समझा है. इसलिए रघुवर दास के झारखंड की राजनीति में सक्रिय होने और बड़ी भूमिका निभाने की संभावना जताई जा रही है.

     


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