सारंडा और बस्तर में कैसा है नक्सल अभियान,जंगल में कैसे रहते है जवान,देखिए ग्राउन्ड की हकीकत

    How is the Naxal campaign in Saranda and Bastar, how do the soldiers live in the jungle, see the ground रियलिटी | सारंडा और बस्तर में कैसा है नक्सल अभियान,जंगल में कैसे रहते है जवान,देखिए ग्राउन्ड की हकीकत

    TNPDESK: नक्सल और ग्रामीण इलाका जहां एक अलग सा सन्नाटा दिखता है. ना मोबाईल नेटवर्क और ना ही सड़क से कोई कनेक्टिविटी. लेकिन ऐसे में उसी जंगल के अंदर जवान कैसे रहते है और नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन में कितनी चुनौती होती है. आखिर जंगल में सुरक्षा बल के जवान क्या खाते है और सोते कहां है. यह सब इस स्टोरी में सब दिखाएंगे.बस्तर के जंगल में जवानों का डेरा कहा रहता है. लेकिन इससे पहले आपको इस नक्सल अभियान की कुछ मुख्य बाते बताते है.

    देश में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बल के जवानों का अभियान जंगल में तेज है. नक्सल के खिलाफ CRPF, COBRA,समेत सभी राज्य की अलग अलग नक्सल स्पेशल टीम जंगल में उतर कर माओवादियों के खात्मे के लिए अभियान चला रहे है. इस अभियान में अब जवानों के टारगेट पर बड़े माओवादी नेता है. जिनका सफाया जल्द करने के लिए जवानों ने कमर कस ली है.

    झारखंड के सारंडा से लेकर छत्तीसगढ़ के बस्तर तक जंगल में एक अघोषित युद्ध जैसे हालत है. हर दिन शांत पड़ा जंगल अब गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज रहे है. ऐसे में अब बताते है कि आखिर जवान कैसे जंगल में इस कठिन टास्क को पूरा कर रहे है. आपको यह तस्वीर दिखाते है जंगल में रोटी खाते और सब्जी खाते जवान. .

    एक और वीडियो दिखाते है. जब जंगल में सुरक्षा बल के जवान अभियान में निकलते है तो उन्हे मालूम नहीं होता है कि यह कितने दिनों तक चलेगा. जहां रुक गए उसी जगह पत्थर को ही बिस्तर समझ कर कुछ देर आराम कर लेते है. जवानों की यह तस्वीर बता रही है कि नक्सल अभियान में कितने दर्द एमन जवान भी है. हलाकी हौसला और नक्सलियों के खात्मे को लेकर एक जुनून इनके अंदर है. अपनी माटी को सुरक्षित करने के लिए हर दर्द को बड़े ही बेहतर तरीके से सह लेते है. और फिर अपना काम शुरू कर लेते है.

    अब आपको सारंडा और बस्तर की मौजूदा हालात के बारे में बताते है. सारंडा का जंगल बेहद घना है. और इस जंगल में सुरक्षा बल के जवानों का टारगेट मिसिर बेसरा और असीम मण्डल है. जिनपर एक एक करोड़ का इनाम है. मिसिर बेसरा पोलित ब्योरो सदस्य है जबकि असीम मण्डल सेंट्रल कमिटी के सदस्य है. माना जा रहा है कि इनके साथ करिन 30-35 सदस्य है. जिनके हाथ में हथियार है. वहीं छत्तीसगढ़ की बात कर ले तो यहां के बस्तर रेंज में भी महज 100 के करीब नक्सली बैठे है.जिनमें कई इनामी नक्सली है.

    और माना जा रहा है कि सारंडा और बस्तर ही आखरी किला बचा है. जहां कुछ हिस्सों में अभी भी नक्सली मौजूद है. ऐसे में यही वजह है कि इन इलाकों में जवानों की मौजूदगी बढ़ा दी गई. और टारगेट सीधा सेट है.                                               



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