ताज़ी मछली से एलेप्पी एक्सप्रेस कैसे बन गई है मालामाल, जानिए इसका पूरा गणित 

    ताज़ी मछली से एलेप्पी एक्सप्रेस कैसे बन गई है मालामाल, जानिए इसका पूरा गणित

    धनबाद(DHANBAD) : पूर्व मध्य रेलवे की एलेप्पी एक्सप्रेस को मछली ने जोन का  सर्वाधिक धनी ट्रेन बना दिया है. यात्री से आय में पहले से टॉप टेन में चल रही यह ट्रेन माल ढुलाई की वजह से जोन में नंबर वन आमदनी वाली ट्रेन हो गई है. वैसे तो एलेप्पी एक्सप्रेस 2535 किलोमीटर की यात्रा करती है लेकिन विशाखापट्टनम से चेन्नई के लिए हर दिन लगभग 4 टन मछलियां ढुलाई के लिए बुक होती है. इस वजह से आमदनी बढ़ जाती है.  पूर्व मध्य रेलवे ने अभी हाल ही में जोन की 29 ट्रेनों  के पार्सल लीज की आमदनी का आंकड़ा जारी किया है.  

    एलेप्पी एक्सप्रेस के प्रति ट्रिप का किराया सबसे ऊपर

    इसमें एलेप्पी एक्सप्रेस के प्रति ट्रिप  का किराया सबसे ऊपर है.  दूसरे नंबर पर बरौनी बांद्रा टर्मिनल एक्सप्रेस है.  पटना हावड़ा शताब्दी एक्सप्रेस की आमदनी प्रति ट्रिप  सबसे कम है.  एलेप्पी एक्सप्रेस को झारखंड का एंबुलेंस ट्रेन भी कहा जाता है.  सूचना के अनुसार  रेलवे अब विभागीय स्तर पर पार्सल बुकिंग से हाथ खींचने की तैयारी कर रहा है.  धीरे-धीरे पार्सल बोगियों को प्राइवेट हाथों में देने के तैयारी चल रही है. एलेप्पी एक्सप्रेस और धनबाद फिरोजपुर गंगा सतलज एक्सप्रेस की आगे की एस एल आर बोगी पहले से ही लीज पर है.  इधर , जानकारी अभी मिल रही है कि बहुत जल्द ही रेलवे पीछे की एसएलआर बोगी को भी लीज पर  दे देगा.  सप्ताह में 5 दिन के लिए ट्रेन की एसएलआर बोगी   को लीज पर देने के लिए टेंडर  निकालने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. 

    कोयला ढुलाई के कारण धनबाद रेल मंडल देश में नंबर वन 
     
    धनबाद रेल मंडल कोयला ढुलाई के कारण आमदनी में देश में नंबर वन है.  रेलवे से कोयले की ढुलाई  की मात्रा हर साल बढ़ रही है.  इसे प्रदूषित रहित ट्रांसपोर्टिंग के लिए अच्छा माध्यम माना गया है.  लेकिन यहां सवाल है कि रेलवे कोयलांचल से आमदनी तो खूब करता है लेकिन जब सुविधाएं देने की बात आती है तो हाथ पीछे खींच लेता है.  इतना ही नहीं, जो सुविधाएं यहां के लोगों को पहले से उपलब्ध है, उनमें भी कटौती की तैयारी की जाती है.  धनबाद से देश के अन्य प्रदेशों  के लिए लगातार सीधी ट्रेन की मांग उठती रही है लेकिन रेलवे हमेशा धनबाद सहित कोयलांचल को दूसरे दर्जे का मान कर सुबिधाओ  से मुँह फेरता रहा है.

    रिपोर्ट : शांभवी  सिंह, धनबाद



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