रांची (RANCHI): झारखंड हाईकोर्ट ने बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में बंद महिला कैदी के कथित यौन शोषण मामले को गंभीरता से लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है. मामले से जुड़ी खबरों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए अदालत ने साफ कर दिया है कि इस पूरे प्रकरण की मॉनिटरिंग अब खुद हाईकोर्ट करेगा. कोर्ट के इस फैसले के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है.
शुक्रवार को हाईकोर्ट की वेकेशन बेंच में मामले की सुनवाई हुई. जस्टिस रंगोन मुखोपाध्याय और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और झारखंड के पुलिस महानिदेशक (DGP) से पूरे मामले पर विस्तृत जवाब तलब किया है. अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 8 जून की तारीख निर्धारित की है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि मामला बेहद संवेदनशील और गंभीर है, इसलिए इसकी निगरानी अदालत स्वयं करेगी. हाईकोर्ट ने इस प्रकरण को जनहित याचिका का रूप देते हुए नियमित सुनवाई शुरू कर दी है.
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और संबंधित पहलुओं की जांच की जा रही है. हालांकि कोर्ट ने संकेत दिए कि वह जांच की प्रगति पर लगातार नजर बनाए रखेगा. इस घटना के सामने आने के बाद जेल सुरक्षा व्यवस्था और महिला कैदियों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं. सामाजिक संगठनों और कानूनी जानकारों का कहना है कि हाईकोर्ट की सीधी निगरानी से मामले में निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय होने की उम्मीद बढ़ गई है. अब सभी की नजर 8 जून को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां राज्य सरकार और DGP को अदालत के सामने अपना विस्तृत पक्ष रखना होगा.

