मृत युवक के नाम पर बन गया होमगार्ड, रांची में चौंकाने वाला मामला, सिस्टम की खुली पोल

    होमगार्ड नामांकन प्रक्रिया में अनियमितता का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. जानकारी के अनुसार, जिस अभ्यर्थी के नाम पर नियुक्ति की गई, उसकी पहले ही मृत्यु हो चुकी थी, इसके  बावजूद उसके नाम पर किसी दूसरे व्यक्ति ने कथित रूप से फर्जी तरीके से नौकरी हासिल कर ली.

    मृत युवक के नाम पर बन गया होमगार्ड, रांची में चौंकाने वाला मामला, सिस्टम की खुली पोल

    रांची(RANCHI): होमगार्ड नामांकन प्रक्रिया में अनियमितता का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. जानकारी के अनुसार, जिस अभ्यर्थी के नाम पर नियुक्ति की गई, उसकी पहले ही मृत्यु हो चुकी थी, इसके  बावजूद उसके नाम पर किसी दूसरे व्यक्ति ने कथित रूप से फर्जी तरीके से नौकरी हासिल कर ली.

    इस पूरे मामले को लेकर झारखंड गृह रक्षा वाहिनी के पूर्व कंपनी कमांडर कैलाश प्रसाद यादव ने महानिदेशक–सह–महासमादेष्टा, गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशमन सेवाएं, झारखंड को लिखित शिकायत सौंपी है. उन्होंने इस प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर कार्रवाई हो.

    बताया जा रहा है कि यह मामला जिला समादेष्टा हरिहर सिंह मुंडा के कार्यकाल से जुड़ा हुआ है. शिकायत के मुताबिक, विज्ञापन संख्या 01/2016 के तहत शहरी होमगार्ड भर्ती के लिए सुधीर कुमार नाम के अभ्यर्थी ने आवेदन किया था. हालांकि, प्रशिक्षण शुरू होने से पहले ही उस अभ्यर्थी का निधन हो गया था.

    सूत्रों के अनुसार, इसी बीच बिहार के जहानाबाद निवासी एक व्यक्ति को इस स्थिति की जानकारी मिली और उसने कथित तौर पर मृत अभ्यर्थी की पहचान का दुरुपयोग करते हुए खुद को सुधीर कुमार बताकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नामांकन करा लिया. हैरानी की बात यह है कि बिना पर्याप्त सत्यापन के उसे होमगार्ड नियुक्त भी कर दिया गया.

    अब इस मामले के उजागर होने के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. शिकायतकर्ता ने जांच के दौरान हस्ताक्षर मिलान, शारीरिक दक्षता परीक्षा से जुड़े फोटो और वीडियो की जांच, मास्टर चार्ट में दर्ज शारीरिक विवरण, पहचान चिन्ह, आवासीय प्रमाणपत्र और पुलिस सत्यापन जैसे पहलुओं की गहन पड़ताल की मांग की है.

    फिलहाल, मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और उम्मीद की जा रही है कि जांच के बाद पूरी सच्चाई सामने आएगी. यह घटना भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर करती है.

     


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