धनबाद(DHANBAD): कोयलांचल में अपराध का इतिहास इतना गहरा है कि लिखते- लिखते स्याही सूख जाएगी, लेकिन इतिहास खत्म नहीं होगा। पात्र बदलते रहे, लेकिन माफियागिरी चलती रही. यह माफियागिरी आज भी चल रही है. इसी दौर में कोयलांचल में एक ऐसा समय आया, जिससे यह साबित हुआ कि --"जाको राखे साइयां, मार सके ना कोय ", यह कहावत झरिया से दो बार के विधायक रहे एसके राय पर पूरी तरह चरितार्थ हुई थी. . उन्हें मारने की कई कोशिशें की गई, लेकिन उनकी मौत स्वाभाविक हुई.
घनुडीह कोलियरी में यूनियन को लेकर चला था विवाद ------
दरअसल, धनबाद के घनुडीह कोलियरी में यूनियन को लेकर सूर्यदेव सिंह और एसके राय में तनातनी चलती थी. घनुडीह में एसके राय को कमजोर करने के लिए कई तरकीब आजमाए गए. बुजुर्ग बताते हैं कि एसके राय को मारने की कई कोशिशें हुई, लेकिन उस समय एसके राय के लोग भी संगठित थे और हर हमले का जवाब भी दे रहे थे. झरिया के एक बुजुर्ग बताते हैं कि तनातनी की शुरुआत तब अधिक हो गई, जब एसके राय के एक आदमी की झरिया में गोली मारकर हत्या कर दी गई. फिर कुछ दिन बाद एसके राय पर उस समय हमला हुआ, जब वह घर में जाने के लिए झरिया में गाड़ी से उतर रहे थे. उस समय एसके राय झरिया में ही रहते थे.
झरिया में हुआ हमला तो चली गई थी तीन जानें
जानकार बताते हैं कि घर जाने के लिए उन्हें एक पतली गली से होकर गुजरना पड़ता था. जब वह गाड़ी से उतरकर घर की ओर बढ़े तो फायरिंग शुरू हो गई. एस के राय तो बच गए लेकिन इस हमलाकांड में एसके राय के तीन अंगरक्षक मारे गए. एसके राय अपनी पिस्तौल से फायरिंग कर बच गए और भागते हुए घर में प्रवेश कर गए. लोग बताते हैं कि एसके राय पर दूसरी बार बस्ताकोला में डंपर से उस समय हमला हुआ ,जब वह धनबाद से झरिया जा रहे थे. उस हमले में डंपर से उनकी गाड़ी को उलट देने और उसके परखच्चे उड़ा देने की कोशिश की गई, लेकिन इस घटना में भी वह बच गए. लोग बताते हैं कि एसके राय पर तीसरी बार भी हमला हुआ था. यह हमला भी धनबाद से झरिया जाने के क्रम में हुआ. उन पर फायरिंग की गई लेकिन हमले में एक गोली उनके कंधे को पार करती हुई निकल गई थी. फायरिंग के बीच उनका चालक गाड़ी निकाल कर तेज गति से भगा ले गया.
कैसे पहुंचे थे बंदूखधारी और शुरू हो गई थी फायरिंग
जानकार बताते हैं कि एक फरवरी 1988 को धनबाद के लुबी सर्कुलर रोड स्थित राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ कार्यालय के सामने भी एक बड़ी घटना हुई थी. यह भी एसके राय पर हमला ही था. 4-5 गाड़ियों पर सवार बंदूखधारी मजदूर संघ कार्यालय पहुंचे थे. वहां एसके राय की गाड़ी भी लगी हुई थी. उस गाड़ी पर फायरिंग होने लगी. गोलियों की आवाज सुनकर सभी भागे और जहां-तहां छुप गए. इस घटना में धनबाद के अजातशत्रु कहे जाने वाले उमाकांत सिंह की जान चली गई. जान इसलिए गई कि वह अपनी जगह से हिले- डुले नहीं। उन्हें भरोसा था कि उन्हें कोई नहीं मरेगा, लेकिन हमलावरों ने उन्हें अपना निशाना बना दिया।
क्यों एक घटना से पूरी तरह हिल गया था धनबाद
जानकार बताते हैं कि उस समय संघ कार्यालय के एक कमरे में एसके राय भी बैठे हुए थे. हमलावर वहां पहुंचने ही वाले थे, तब तक एसके राय के अंगरक्षको ने अपनी पिस्तौल से गोलियां दागनी शुरू कर दी. उसके बाद हमलावर भाग निकले, लेकिन चार लोगों की जान चली गई थी. जिसमे एक उमाकांत सिंह भी थे. उमा बाबू को इलाज के लिए दिल्ली ले जाया जा रहा था लेकिन रस्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया था. एसके राय की गाड़ी में बैठे तीन लोग मारे गए थे. एसपी के बंगले के बगल स्थित राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ पर दिनदहाड़े हुए इस हमले से पूरा धनबाद हिल गया था.

