दुमका में 16 फरवरी से 23 फरवरी तक होगा हिजला मेला का आयोजन! ग्रामीणों ने की बैठक, पढ़ें क्यों दी आंदोलन की चेतावनी  

    दुमका में 16 फरवरी से 23 फरवरी तक होगा हिजला मेला का आयोजन! ग्रामीणों ने की बैठक, पढ़ें क्यों दी आंदोलन की चेतावनी

    दुमका(DUMKA):दुमका के हिजला में प्रत्येक वर्ष मयूराक्षी नदी के तट पर लगता है राजकीय जनजाति हिजला मेला. ब्रिटिश काल में 1890 में हिजला मेला की शुरुआत हिज लॉ (His Law) नाम से हुआ.कालांतर में इसका अपभ्रंश हिजला हो गया.पूर्ववर्ती बीजेपी शासन में जनजाति शब्द जोड़ते हुए इसे राजकीय मेला का दर्जा दिया गया.

    16 फरवरी से 23 फरवरी तक मेला का आयोजन होना है

      वहीं इस वर्ष 16 फरवरी से 23 फरवरी तक मेला का आयोजन होना है. इसको लेकर प्रशासनिक तैयारी युद्ध स्तर पर जारी है. इस सबके बीच मंगलवार को हिजला के ग्रामीणों ने सामाजिक संगठन  दिसोम मरांग बुरु संताली अरिचली आर लेगचर अखड़ा के साथ मिलकर बैठक की. यह बैठक हिजला स्थित दिसोम मरांग बुरु थान में हुई.बैठक के पूर्व सभी ने दिसोम मरांग बुरु थान (मेला परिसर में स्थित संतालों का पूज्य स्थल)में पूजा अर्चना किया.

    ग्रामीणों ने दिसोम मरांग बुरु थान के पक्कीकरण कार्य के पहल पर आभार व्यक्त किया

    बैठक के दौरान ग्रामीणों ने शिबू सोरेन, हेमंत सोरेन, बसंत सोरेन और जिला प्रशासन को दिसोम मरांग बुरु थान के पक्कीकरण कार्य के पहल पर आभार व्यक्त किया.इसके साथ ही ग्रामीणों ने इस बात पर नाराजगी जताई कि पक्कीकरण कार्य शुरू किये एक वर्ष से भी अधिक समय हो गया लेकिन अब तक  दिसोम मरांग बुरु थान का पक्कीकरण पूरा नहीं किया गया.चारो ओर स्टील ग्रील, गेट, बिजली, रंग रोगन, कई जगह मार्बल टाइल्स आदि अब तक नही लगाया गया है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि अबुआ दिसोम अबुआ राज है उसके बाद भी संताल आदिवासियों का पूज्य स्थल दिसोम मरांग बुरु थान का पक्कीकरण का पूरा नहीं किया गया है, यह काफी दुखद है, जबकि संताल आदिवासियों का मानना है कि दिसोम मरांग बुरु थान के कारण ही राजकीय जनजातीय हिजला मेला महोत्सव की शुरुआत सैकड़ों वर्ष पूर्व हुआ था.

    पढ़ें बुरु थान के नायकी / पुजारी राजेन्द्र बास्की का  क्या कहना है

      दिसोम मरांग बुरु थान के नायकी / पुजारी राजेन्द्र बास्की का  कहना है पिछले वर्ष उन्हें पूरा सम्मान राशि मेला समिति ने भुगतान नही किया है. नायकी और ग्रामीणों की मांग है कि बकाया प्रोत्साहन राशि और वर्तमान सम्मान राशि अग्रिम में दिया जाय ताकि मेला के लिये पूजा अर्चना विधिवत किया जा सके. पिछले वर्ष मेला में सेवा देने वाले स्वंय सेवको का कहना है कि पिछले वर्ष की सम्मान राशि अब तक सभी को नही मिला है. जिसका भुगतान जल्दी किया जाए.

    पढ़ें क्यों दी आंदोलन की चेतावनी

      ग्रामीणों की मांग है कि कि जनजातीय मेला होने के कारण दिसोम मरांग बुरु थान का नाम संताली(ओलचिकी और देवनागरी) से बैनर लिखा जाय इसके साथ साथ मुख्य तोरोन द्वार  भी संताली  में हो. अखड़ा और ग्रामीणों ने मेला समिति, प्रशासन, विधायक और मुख्यमंत्री से मांग किया है कि पूर्व की भांति मेला उपरांत जल्द से जल्द सभी को सम्मानित राशि तुरंत दिया जाय. अगर अखड़ा और ग्रामीणों की मांगो को नहीं माना जाता है तो अखड़ा और ग्रामीण मजबूर होकर सड़क पर उतर कर आंदोलन करने के लिये विवश होंगे.

    रिपोर्ट-पंचम झा


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