चाईबासा (CHAIBASA): पश्चिम सिंहभूम के घने सारंडा जंगल में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों ने अब हाईटेक रणनीति अपनाई है. पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां GPS तकनीक के जरिए नक्सलियों की लोकेशन ट्रेस कर रही हैं, जिससे ऑपरेशन को बड़ी सफलता मिल रही है. सुरक्षाबल नक्सलियों तक पहुंचने के लिए उनके राशन सप्लाई चैन पर नजर रख रहे हैं. राशन के बोरों में गुप्त रूप से GPS डिवाइस लगाए जा रहे हैं. जैसे ही ये बोरे नक्सलियों तक पहुंचते हैं, उनकी सटीक लोकेशन सुरक्षाबलों को मिल जाती है. इसके बाद इलाके की घेराबंदी कर ऑपरेशन चलाया जाता है. इस तकनीक के कारण नक्सली बार-बार सुरक्षा बलों के घेरे में फंस रहे हैं और उनके ठिकानों का पता आसानी से लगाया जा रहा है. हाल ही में इसी तकनीक से सुरक्षाबलो ने कुख्यात शीर्ष माओवादी नेता अनल दा उर्फ पतिराम मांझी और उसके दस्ते का खत्मा किया था. सारंडा जैसे दुर्गम जंगलों में यह तकनीक सुरक्षाबलों के लिए गेम चेंजर साबित हो रही है.
नक्सलियों ने राशन लेना छोड़ा
सारंडा में सुरक्षाबलों की GPS आधारित रणनीति का जवाब नक्सली अपने तरीके से दे रहे है. अब नक्सलियों ने बाहरी स्रोतों से राशन लेना लगभग बंद कर दिया है. उन्हें आशंका है कि राशन के जरिए उनकी लोकेशन ट्रेस की जा रही है. बताया जा रहा है कि नक्सली अब जंगल में उपलब्ध संसाधनों या अपने पुराने ठिकानों पर निर्भर हो रहे हैं, ताकि सुरक्षा बलों की निगरानी से बच सकें. इससे साफ है कि तकनीकी दबाव के कारण नक्सली अपनी रणनीति बदलने को मजबूर हो गए हैं. इसी मजबूरी में मिसिर का दस्ता अब घिर गया है.
जनवरी में 17 नक्सली मारे गए थे
इसी साल जनवरी माह में सुरक्षाबलों ने सारंडा जंगल में कुख्यात शीर्ष माओवादी नेता अनल दा उर्फ पतिराम मांझी समेत कुल 17 नक्सलियों को मार गिराया था. यह एनकाउंटर किरीबुरु थाना क्षेत्र के कुम्डीह में हुई थी. अनल और उसका दस्ता जीपीएस से ही ट्रेस हुआ था. अनल पर झारखंड में 1 करोड़, ओडिशा में 1.20 करोड़ और एनआईए की ओर से 15 लाख रुपए का इनाम घोषित था.
चार साल में 30 मुठभेड़, 28 नक्सली ढेर
पश्चिम सिंहभूम का इलाका तीन दशक तक माओवाद से प्रभावित रहा. लेकिन बीते वर्षों में सुरक्षाबलों ने निर्णायक बढ़त बनाई है. 2022 से जनवरी 2026 तक सारंडा, कोल्हान और पोड़ाहाट जंगलों में 30 मुठभेड़ हुईं, जिनमें 28 नक्सली मारे गए. इस दौरान 43 बंकर ध्वस्त किए गए.190 नक्सली गिरफ्तार हुए और 36 नक्सलियों ने सरेंडर किया.
अभियान में 11 जवान शहीद हुए, जबकि 692 IED बरामद किए गए. साथ ही 36 रायफल, 46 देशी हथियार, 5 टन विस्फोटक और 49.32 लाख रुपये लेवी भी जब्त की गई.


