विधायक इरफान पर तोहमतों की बारिश कर हरिमोहन मिश्रा ने छोड़ी कांग्रेस पार्टी, आखिर जामताड़ा समेत संथाल में क्या होगा असर ? 

    विधायक इरफान पर तोहमतों की बारिश कर हरिमोहन मिश्रा ने छोड़ी कांग्रेस पार्टी, आखिर जामताड़ा समेत संथाल में क्या होगा असर ? 

    जामताड़ा:- कांग्रेस पार्टी में अलगाव, बिखराव और मनमुटाव का सिलसिला सरीखा चल पड़ा है. कहीं न कहीं कोई न कोई पार्टी से नाराज होकर रुखसत हो ही रहे हैं. झारखंड कांग्रेस पार्टी मे भी घमासन मचा हुआ है. चंपई सोरेन सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में कांग्रेस विधायकों की बगावत को कौन भूल सकता है, जब नाराज विधायक दिल्ली की दौड़ लगा डाली थी. इतना ही नहीं कोल्हान का बड़ा नाम और चाईबासा सांसद गीता कोड़ा भाजपा मे शमिल हो गयी और जाते-जाते कांग्रेस पार्टी तमाम आरोप लगाए. टूट का ये सिलसिला जारी है . अब जामताड़ा कांग्रेस के अध्यक्ष हरिमोहन मिश्रा ने भाजपा का दामन थाम लिया . जामताड़ा समेत संथाल में कांग्रेस के लिए ये एक बड़ा झटका लोकसभा चुनाव से पहले है. 

    कांग्रेस के पुराने नेता हरिमोहन मिश्रा ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के समक्ष भाजपा की सदस्यता ग्रहण जमशेदपुर में की. उनके साथ कांग्रेस जिला कमिटी के कई सदस्यों ने भी भाजपा का दामन थामा. ऐसा कहा जा रहा है कि अभी ये टूट का सिलसिला ओर बढ़ेगा और जामताड़ा कांग्रेस के  कई सदस्य भाजपा में शामिल होंगे. 

    कौन हैं हरिमोहन मिश्रा ? 

    हरिमोहन मिश्रा कांग्रेस के एक पुराने कार्यकर्ता रहे हैं, तकरीबन दो दशक यानि लगभग बीस साल पहले उन्होने एनएसयूआई के सदस्य के तौर पर कांग्रेस पार्टी के लिए काम करना  शुरु किया था . साल 2006 में मनरेगा कन्वेनर से उन्होंने अपनी सियासी पारी की शुरुआत की थी और उसके बाद मजबूती से कांग्रेस पार्टी को आगे बढ़ाते रहें .हरिमोहन मिश्रा इसके बाद यूथ कांग्रेस के जिला अध्यक्ष और बाद में आईसीसी के सदस्य बनें. पिछले साल ही उन्हें जामताड़ा कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया था. लेकिन, जामताड़ा के ही कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी से उनका टकराव लगातार बढ़ता जा रहा था . आखिरकर कांग्रेस पार्टी से एक लंबी पारी खेलने के बाद उनका अलगाव हो ही गया. हरिमोहन मिश्रा एक तजुर्बेकार नेता है और उन्हें संथाल परगना की अच्छी समझ के साथ-साथ पकड़ भी है. 

    क्यों छोड़ी कांग्रेस ? 

    कांग्रेस से हटने के बाद  हरिमोहन मिश्रा ने स्थानीय विधायक डां इरफान अंसारी और उनके पिता फुरकान अंसारी पर जमकर बरसे . उन्होंने आरोप लगाया कि वह हिंदू है और उनके तिलक लगाने पर भी जामताड़ा विधायक इरफान और उनके पिता फुरकान अंसारी को एतराज होता था . उनके लगातार इस रवैये से पार्टी में असहज महसूस कर रहे थे. उन्होंने ये भी कहा कि पिता-पुत्र दोनों ही हिन्दू विरोधी है और जो लगातार कांग्रेस पार्टी को नुकसान पहुंचने का काम किया है . उनकी मंशा पार्टी संगठन को अपने जेब में रखने की रही है और लगातार दोनों मिलकर हस्तक्षेप करते रहते हैं. उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि संथाल परगना में जो कांग्रेस पार्टी की आज दुर्दशा है, इसके लिए पिता-पुत्र की जोड़ी ही जिम्मेदार है. उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि आदिवासियों के हित का राग तो अलापा जाता है. लेकिन उनके कार्यकाल में ही सबसे ज्यादा आदिवासियों के शोषण हुआ. हरिमोहन मिश्रा ने भी कहा कि विधायक फंड और तालाब , कुआं में कार्यकर्ताओं से 30 से 40 प्रतिशत तक वसूलने का काम किया जाता है. 

    भाजपा को क्या फायदा होगा ? 

    डां इरफान अंसारी लगातार दो बार से कांग्रेस के टिकट पर जामताड़ा विधानसभा से विधायक है. उनके बड़बोलेपन की चर्चा अक्सर होते रहती है. हरिमोहन मिश्रा के आने से जामताड़ा निवासी और भाजपा महिला मोर्चा की सदस्य बबीता झा का मानना है कि  पार्टी संगठन यहां मजबूत होगा . उनके आने से भाजपा की ताकत भी बढ़ेगी . उन्होंने हरिमोहन मिश्रा को एक साफ सुथरी छवि वाला नेता भी बताया और कहा कि कांग्रेस के तुष्टिकरण और परिवारवाद का नतीजा है कि लोग देश की इस सबसे पुरानी पार्टी को छोड़ भाजपा से जुड़ रहे हैं . 

    अभी लोकसभा चुनाव के बाद साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होगा . ऐसी सूरत में  हरिमोहन मिश्रा के आने से कांग्रेस को झटका लगा है. इससे इंकार तो नहीं किया जा सकता . लेकिन, सबसे बड़ा इमत्हान विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए होगा, क्योंकि , उम्मीद है कि जामताड़ा में इरफान अंसारी की ही चुनौती होगी और इस बार कमल फूल यहां खिलता है या नहीं ये देखना बेहद दिलचस्प होगा. अगर इरफान यहां फिर कांग्रेस पार्टी से जीतते हैं, तो जामताड़ा में उनकी हैट्रिक होगी. 

    रिपोर्ट-  आर.पी सिंह, जामताड़ा 


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