चाईबासा (CHAIBASA): चाईबासा के सारंडा क्षेत्र में एक बार फिर स्थानीय रोजगार का मुद्दा उग्र रूप लेता दिख रहा है. रांजाबुरु माइंस को लेकर खदान प्रभावित गांवों के ग्रामीणों, मुंडा-मानकी और सारंडा विकास समिति ने स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. आंदोलनकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि 20 मई तक पूर्व में हुए समझौते को लागू नहीं किया गया, तो गुवा खदान और लौह अयस्क डिस्पैच को पूरी तरह अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया जाएगा.

गंगदा पंचायत के मुखिया राजू शांडिल ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि स्थानीय लोगों की जमीन और संसाधनों पर बाहरी लोगों का कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने आरोप लगाया कि कई दौर के आंदोलन और खदान बंदी के बावजूद प्रबंधन ने अपनी कार्यशैली नहीं बदली है. उन्होंने कहा कि इस बार ग्रामीण निर्णायक लड़ाई के मूड में हैं. ग्रामीणों का कहना है कि रांजाबुरु माइंस को लेकर पहले भी लंबा आंदोलन हुआ था, जिसके बाद मंत्री दीपक बिरुआ, प्रशासन, सेल प्रबंधन और ग्रामीणों के बीच त्रिपक्षीय वार्ता हुई थी. उस बैठक में यह सहमति बनी थी कि खदान प्रभावित 18 गांवों के युवाओं को प्राथमिकता देते हुए 75 प्रतिशत स्थानीय रोजगार दिया जाएगा. साथ ही स्थानीय समिति को जल छिड़काव, ट्रांसपोर्टिंग और अन्य कार्यों में भागीदारी सुनिश्चित करने का भरोसा भी दिया गया था.

लेकिन आंदोलनकारियों का आरोप है की समझौते के बावजूद ठेका कंपनी “मां सरला” द्वारा बाहरी लोगों की नियुक्ति जारी है. ग्रामीणों के मुताबिक ड्राइवर, खलासी, झंडा दिखाने वाले कर्मियों सहित कई पदों पर स्थानीय युवाओं की अनदेखी की जा रही है, जबकि क्षेत्र के बेरोजगार युवा रोजगार के इंतजार में हैं. ग्रामीणों ने यह भी कहा कि खदानों से निकलने वाली धूल, प्रदूषण और पर्यावरणीय नुकसान का असर स्थानीय लोग झेल रहे हैं, लेकिन रोजगार का लाभ बाहरी लोगों को दिया जा रहा है. इससे पूरे क्षेत्र में नाराजगी बढ़ती जा रही है.

हालांकि प्रशासन और मंत्री के प्रतिनिधियों द्वारा आंदोलनकारियों को वार्ता का आश्वासन दिया गया है, जिसके बाद फिलहाल आंदोलन को अस्थायी रूप से स्थगित किया गया है. लेकिन आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया है कि यदि 20 मई की बैठक में ठोस फैसला नहीं हुआ, तो गुवा खदान, डिस्पैच और ट्रांसपोर्टिंग पूरी तरह बंद कर दी जाएगी. अब पूरे सारंडा क्षेत्र की नजर आगामी वार्ता पर टिकी हुई है.
रिपोर्ट : संतोष वर्मा

