GST घोटाला --कोयला तस्करो के संगठित गिरोह तक अब ऐसे पहुंचने वाली है जांच की आंच, क्यों है काले धंधे में खलबली !

    GST घोटाला --कोयला तस्करो के संगठित गिरोह तक अब ऐसे पहुंचने वाली है जांच की आंच, क्यों है काले धंधे में खलबली !

    धनबाद(DHANBAD) : धनबाद में बड़े पैमाने पर जीएसटी घोटाले की जांच की आंच  अब कोयला चोर- तस्कर और उनके तथाकथित "मास्टरमाइंड" तक पहुंच सकती है.  अस्तित्वविहीन कंपनियों के नाम पर परमिट पर हुए "खेल' की परत अब प्याज के छिलके की भांति परत दर  परत खुल रही है. अगर सूत्रों पर भरोसा करें, तो अस्तित्वविहीन  कंपनी बनाकर ई वे बिल यानी  परमिट निकाला जाता है. सूत्र बताते हैं कि धनबाद के बाजार में₹300 प्रति टन के हिसाब से कोयल का परमिट बिकता है. इसी प्रकार लोहे  का परमिट ₹400 प्रति टन के हिसाब से बिकता है.  

    कई गिरोह अपने -अपने ढंग से सरकार को लगा रहे चूना 

    इस काम में एक नहीं ,कई गिरोह लगे हुए है. दरअसल, दो नंबर का कोयला अथवा लोहा दूसरे राज्य में भेजने के लिए परमिट का इस्तेमाल किया जाता है.  कुछ ऐसे भी गिरोह हैं, जो दूसरे से परमिट लेते हैं और कई खुद की अस्तित्व विहीन कंपनी बनाकर परमिट बेचते है.  राज्य कर विभाग की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, खुलासे  होते जा रहे है. एक समय था, जब धनबाद के एसपी अनिल पलटा हुआ करते थे, तो उन्होंने लिंकेज के कोयले का "खेल" को पकड़ा था. उस समय बीसीसीएल में अथवा कोल इंडिया में लिंकेज  पर ही कोयला मिलता था. 

    एक वह समय था और आज का यह समय है 

    लिंकेज का कोयला सिर्फ कागज पर जम्मू कश्मीर तक पहुंचता था. उन्होंने जब इसकी गहराई से जांच कराई तो कई बड़े-बड़े खुलासे  हुए थे.  जब उद्योगों के पत्ते पर पुलिस टीम पहुंची तो वहां भैंस का तबेला चल रहा था.  उस समय इस मामले में सख्त कार्रवाई हुई थी और कई लोगों का खेल बिगड़ गया था.  अब लिंकेज तो नहीं ,लेकिन परमिट के लिए अस्तित्वविहीन कंपनियों  का सहारा लिया जा रहा है.  कुछ दिन पहले जिन  10 कंपनियों  की  राज्य कर विभाग ने जांच की थी और फर्जीवाड़ा  पकड़ा था, उनमें से दो का लाइसेंस फिलहाल सस्पेंड किया गया है.  जबकि आठ  का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है.  निरसा  के पत्ते पर मनीष इंटरप्राइजेज नामक जो कंपनी खोली गई थी, उसके खिलाफ जांच तेज हो गई है.  

    मात्र एक महीने में 214 करोड का टर्न ओवर दिखाया गया है 

    जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि इस फर्जी कंपनी ने  एक महीने के भीतर लगभग 214 करोड रुपए का टर्नओवर दिखा दिया है और लगभग 39 करोड रुपए की टैक्स चोरी की है.  मंगलवार को जांच में खुलासा होने के बाद कंपनी के इनपुट टैक्स क्रेडिट पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दिया गया है.  सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे  हो सकते हैं.  यह कंपनी किसी राजकुमार सिंह के नाम से रजिस्टर्ड है.  कंपनी का पता तेतुलिया, निरसा  दर्शाया गया था.  इसके लिए मकान मालिक के रेट एग्रीमेंट को आधार बनाया गया था.  जब राज्य कर विभाग को संदिग्ध लेन देन की  जानकारी मिली और अधिकारियों ने जब पते पर जांच की, तो पूरा मामला फर्जी निकला।  जांच में सामने आया कि उसे पत्ते पर कोई कंपनी मौजूद ही नहीं थी.  घोटाला पकड़ में आने के बाद विभाग अपना जांच का दायरा बढ़ा दिया है.  देखना है आगे आगे होता क्या है??

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 



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