सरकारी कर्मियों ने लाखों लाभुकों को घर से किया वंचित, जानिए क्या है मामला


रांची(RANCHI): सरकारी तंत्र जब संवेदनहीन हो जाता है तो कल्याणकारी राज्य के जरूरतमंद लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है. ऐसा ही हुआ है झारखंड के गरीबों के साथ सरकार के स्तर पर आवासहीन लोगों के लिए आवास देने की कई योजनाएं चल रही है,लेकिन बहुत सारे लोग सरकारी बाबू या हाकिम इनसे वंचित हो जाते हैं. सरकार उन्हें योजना का लाभ देने के लिए पैसा भी आवंटित कर देती है लेकिन लापरवाही के कारण वे इससे वंचित रह जाते हैं. ऐसा ही मामला सामने आया है ग्रामीण विकास विभाग में जहां क्षेत्र के कर्मचारी और अधिकारी की वजह से मिलने वाला आवास उन्हें नहीं मिल पाया.
भारत सरकार के केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राज्य सरकार के ग्रामीण विकास विभाग को पत्र लिखकर इस बात पर चिंता जताई है कि सामाजिक, आर्थिक और जातीय जनगणना 2011 के आंकड़ों के अनुसार आवंटित आवास का लाभ 1,53,814 लाभुकों को नहीं मिल सका. वित्तीय वर्ष 2021-22 में गलत जॉब कार्ड इंट्री के कारण डेढ़ लाख से अधिक लाभुकों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल पाया. यह लापरवाही स्थानीय स्तर पर हुई है, जिसका अधिकारियों ने सही तरीके से पर्यवेक्षण नहीं किया. भारत सरकार के निर्देशानुसार ग्रामीण विकास विभाग ने सभी उपायुक्त और उप विकास आयुक्त को पत्र लिखकर जिलावार संख्या बताते हुए आवास प्लस ऐप में गलत जॉब कार्ड इंट्री को सुधारने को कहा है. इसके अलावा यह भी चेतावनी दी गई है कि भविष्य में अगर ऐसी गलती की गई तो कर्मचारी और अधिकारी सजा भुगतने के लिए तैयार रहें. यह पत्र विभाग के अपर सचिव रामकुमार सिन्हा ने सभी उपायुक्त और उप विकास आयुक्त को भेजा है.
पत्र के अनुसार वित्तीय वर्ष 2021 22 में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत आवास प्लस ऐप के माध्यम से 14,75,258 लाभुकों के लिए आवास पंजीकृत किए गए जिनमें से 13,21,444 आवास ही स्वीकृत हो पाए. गलत जॉब कार्ड एंट्री के कारण 1,53,814 लाभुकों को आवास स्वीकृत नहीं हो पाए हैं.
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