खदान हादसों से निपटने के लिए तैयार हैं बेटियां ! कोलम्बिया में ट्रॉफी जीतने वाली रेस्क्यू टीम को मंत्री ने किया सम्मानित


धनबाद(DHANBAD):अब तक माइंस रेस्क्यू में पुरुष ही दक्ष होते रहें है, लेकिन अब लड़कियां भी खदान के बीच अपना साहस और जाबांजी दिखाने के लिए तैयार है.2024 में कोलंबिया में हुए 13वें इंटरनेशनल माइन रेस्क्यू कॉम्पिटिशन में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए ट्रॉफी जीतने वाले महिला एवं पुरुष रेस्क्यू प्रशिक्षित कर्मियों को मंत्री के हाथों सम्मान मिला है.
खान हादसों से निपटना है चुनौती
खान हादसों से निपटना हमेशा ही चुनौती भरा रहा है. ऐसे में अब तक माइंस रेस्क्यू में पुरुष ही दक्ष होते रहें है जबकि हिंदुस्तान जिंक प्राइवेट लिमिटेड की महिला कर्मियों की एक रेस्क्यू टीम भी अब अपना साहस और जाबांजी दिखाने के लिए तैयार है.ये हिंदुस्तान की पहली महिला रेस्क्यू टीम है, जिन्होंने 2024 में कोलंबिया में हुए 13वें इंटरनेशनल माइन रेस्क्यू कॉम्पिटिशन में ट्रॉफी जीतकर भारत का मान बढ़ाया.ऐसे जांबाज महिला रेस्क्यू टीम को डीजीएमएस के 125वें स्थापना दिवस समारोह में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री शोभा करंदलाजे ने अपनी हाथों सम्मानित किया.
डब्ल्यूसीएल के रेस्क्यू टीम को भी सम्मानित किया गया
इनके अलावे डब्ल्यूसीएल के रेस्क्यू टीम को भी सम्मानित किया गया, उन्होंने कोलम्बिया में हुए माइन रेस्क्यू कॉम्पिटिशन में हिस्सा लेकर अपनी दक्षता का बखूबी प्रदर्शन किया.महिला रेस्क्यू टीम से संध्या सिंह ने बताया कि खान हादसों से निपटना चुनौती पूर्ण है और यह चुनौती अलग-अलग हादसों में अलग-अलग चुनौती भरा होता है.
भारत के लिए पुरस्कार पाना काफ़ी गौरवान्वित करता है
डब्ल्यूसीएल रेस्क्यू टीम हेड दिनेश कुमार ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होनेवाले कम्पटीशन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए पुरस्कार पाना काफ़ी गौरवान्वित करता है.बता दें कि इंटरनेशनल माइन रेस्क्यू कॉम्पिटिशन में भारत, कनाडा, आस्ट्रेलिया समेत 23 देशों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था.माइंस रेसक्यू में दक्षता हासिल करनेवाली हिंदुस्तान जिंक की यह पहली महिला रेसक्यू टीम है.
रिपोर्ट-नीरज कुमार
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