गरीबी का फायदा उठा बेटी से की शादी, फिर भीख मांगने के लिए किया मजबूर. पढ़िए एक गरीब मां-बेटी की दर्दभरी कहानी

    गरीबी का फायदा उठा बेटी से की शादी, फिर भीख मांगने के लिए किया मजबूर. पढ़िए एक गरीब मां-बेटी की दर्दभरी कहानी

    गोड्डा (GODDA): कहते हैं गरीबी जो ना कराये वो कम है और जब गरीबी होती है तो किस्मत भी साथ नहीं देती. ऐसा ही वाकया जिले के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के पेलगढ़ी गांव से सामने आया है. जहां रामवती नामक एक विधवा महिला जिसकी एक बेटी सुगंधा है. रामवती के पति की मौत के बाद रामवती को बेटी की शादी की चिंता खाए जाने लगी. रामवती अपनी और अपनी बेटी सुगंधा के भरण पोषण बमुश्किल महिला मंडल से जुड़कर कर पाती थी तो शादी कैसे कर पाती. लिहाजा उसने इधर उधर बात करनी शुरू की तो बड़ी कल्याणी गांव का एक शख्स ह्रदय संजय ने रामवती की मज़बूरी भांप कर बेटी की शादी करा देने का भरोसा दिलाया. 

    पति ने ही बाजार में बैठा दिया भीख मांगने 

    ह्रदय संजय ने रामवती से 60 हजार रुपयों का इंतजाम शादी के लिए करने को कहा और ये भी कहा कि वो अपने भांजे से सुगंधा की शादी करवा देगा. रामवती ने महिला मंडल से कर्ज लिया और ह्रदय शंकर को दे दिया. पिछले वर्ष बेटी सुगंधा की शादी हो गयी और पति हरजिंदर सिंह उसे लेकर पंजाब चला गया. पंजाब जाकर दो तीन महीने सब ठीक चला मगर फिर कुछ दिनों बाद पति हरजिन्द्र ने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया. रोजाना मारपीट होने लगी. सुगंधा बर्दाश्त करने लगी मगर हद तो तब होने लगी जब उसके पति ने उससे भीख मांगकर लाने को कहा. उसे कहा जाता था कि अगर वो  भीख मांग कर नहीं लगाएगी तो उसे खाना भी  नहीं मिलेगा. 

    मां के पास ही आना ही बचा था एकमात्र विकल्प

    इतना सब के बाद भी सुगंधा गर्भवती हुई और इस साल अप्रैल माह में एक बेटी को जन्म दिया .बेटी के पैदा होते ही हरजिन्द्र और भी ज्यादा प्रताड़ित करने लगा. प्रताड़ना से तंग आकर सुगंधा ने अपनी मां रामवती से पैसे मंगवाए और पेलगढ़ी आ गयी. यहां आने के बाद जब इसकी शिकायत मुफ्फसिल थाना में करवाई गयी तो थाना ने कार्रवाई के बदले रामवती को ही बेटी को वहां भेजने की सलाह दी गयी. 

    कैसे हो नन्ही सी जान का परवरिश

    सुगंधा की मां रामवती कहती है कि जब से सुगंधा ने बेटी को जन्म दिया तब से उसका पति और भी ज्यादा प्रताड़ित करने लगा. यहां तक की अपनी बेटी की जान लेने की कोशिश कर चूका है .मजबूरन बेटी को यहां मंगवाना पड़ा. वहीं सुगंधा को अब यह चिंता सताने लगी है कि दोनों मां बेटी के अलावे एक नन्ही सी जान की परवरिश कैसे हो पाएगी,कहती हैं गांव और समाज के लोग भी उसे नफरत भरी नजरों से देखते हैं . 

    समाज में कब होगा महिलायों का उत्थान 

    जरुरत है समाज के लोगों को ऐसे असहाय और बेबस महिलाओं के प्रति सहानुभूति रखने की ताकि ऐसी महिलायें भी सम्मान के साथ अपना जीवन यापन सरलतापूर्वक कर सकें और जरुरत पुलिस प्रशासन को भी सुगंधा जैसी महिलाओं की सम्वेदना समझने की ताकि सुगंधा के पति हरजिन्द्र और ह्रदय शंकर जैसे दरिंदों पर कार्यवाई करने की जिससे एक सन्देश समाज के हित में जाय. 

    रिपोर्ट: अजीत सिंह, गोड्डा


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