बांग्लादेशी घुसपैठ से लेकर अलकायदा का सेंटर झारखंड! क्या है गजवा ए हिन्द मकसद

    बांग्लादेशी घुसपैठ से लेकर अलकायदा का सेंटर झारखंड! क्या है गजवा ए हिन्द मकसद

    रांची(RANCHI): झारखंड अब देश में सुर्खियों में बना हुआ है. पहले बांग्लादेश घुसपैठ और अब अल कायदा का कनेक्शन जुड़ गया है. देश में गजवा ए हिन्द और खिलाफत का बिगुल झारखंड से फूंका जा रहा है. अलकायदा जैसे देश विरोधी आतंकी संगठन का सेंटर झारखंड से चलाया जा रहा है. इसका मास्टर माइन्ड झारखंड में बैठ कर देश को बर्बाद करने का मंसूबा पाल कर रखे हुआ है. लेकिन अब दहशत फैलाने वाले सभी सलाखों के पीछे पहुँच गए है.देश की सुरक्षा और जांच एजेंसी ने सभी को दबोच लिया है.अब इनसे राज उगलवाने में लगी है.

    पहले बांगलादेश घुसपैठ की बात कर लेते है. झारखंड समेत अन्य राज्य में घुसपैठ एक गंभीर समस्या बन गया है. संथाल परगना से लेकर राज्य के विभिन्न इलाकों में घुसपैठी बस रहे है.इस गंभीर मुद्दे पर झारखंड हाई कोर्ट भी केंद्र और राज्य सरकार की कार्रवाई से नाखुस है. अगर देखे तो सुरक्षा के जानकर इसे भी देश के लिए घातक बताते है.किसी देश में जब घुसपैठ होगा तो वह उस देश के लिए खतरा है. लेकिन हकीकत को दूर रख कर झारखंड में कोई कार्रवाई होती नहीं दिख रही है.

    शायद यही वजह है कि घुसपैठ पर कार्रवाई नहीं हुई तो यहाँ कट्टरपंथी भी देश विरोधी ताकत को बढ़ाने में लग गए है.अल कायदा जैसे आतंकी संगठन के साथ मिल कर देश को ही अशांत करने की कोशिश में है. लेकिन दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को इसकी भनक समय रहते लगी और कार्रवाई कर सभी को सलाखों के पीछे भेज दिया हैं. झारखंड से आठ लोगों की गिरफ़्तारी हुई है. इसमें देश भर का मास्टर माइन्ड डॉक्टर इस्तयाक निकला है. रांची के मेडिका अस्पताल मेन रेडियो लॉजिस्ट डॉक्टर आतंकी का सरगना निकला है.

    डॉक्टर के द्वारा राजस्थान के भिवंडी में आतंकी कैम्प चलवाया जा रहा था. इस कैम्प में गजवा ए हिन्द के जरिए खिलाफत लाने की ट्रेनिंग दी जा रही थी. मालूम हो की गजवा ए हिन्द का मतलब भारत में जंग कर देश का इस्लामिकरण करना है.इसके बाद खिलाफत यानि देश में अपना राज कायम करना है. खिलाफत और गजवा ए हिन्द के लिए शुरुआत में देश में कई जगह पर सीरियल ब्लास्ट करने की योजना थी इतना ही नहीं कई जगहों पर 26-11 जैसे घातक हमले भी होने वाले थे.

    लेकिन दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के साथ झारखंड ATS ने इनके मंसूबे को नाकाम कर दिया है.अब तक की जांच में जानकारी मिली है कि इस पूरे खेल में फोन का इस्तेमाल बहुत कम किया जाता था. सभी जानकारी डार्क नेट के जरिए एक दूसरे के पास पहुँचती थी.जिससे एजेंसी को ट्रेस करने में भी काफी कठिनाई होती है. जल्दी ये ट्रेस नहीं हो पाता है. लेकिन जांच एजेंसी ने सभी चुनौती को पार कर इस बड़ी साजिश का पर्दाफाश किया है.                                                  


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