‘पहले आंख कुतरा फिर खा गए उंगलियां’...पटना के अस्पताल में चूहों का खौफनाक आतंक

    ‘पहले आंख कुतरा फिर खा गए उंगलियां’...पटना के अस्पताल में चूहों का खौफनाक आतंक

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : अगर आप पटना के अस्पताल में इलाज कराने की सोच रहें है तो एक बार जरूर सोच लें. क्योंकि वहां स्थिति यह है कि मरीज को एडमिट तो कराया जाता है लेकिन देखरेख और सुरक्षा के नाम पर चूहे मिलते है, जो कभी मरीज की आंख तो कभी उंगलियां ही कुतर देते हैं. ऐसे में ही एक ताजा मामला पटना के NMCH अस्पताल से सामने आया है, जहां डायबिटीज मरीज की टखने के जोड़ की सर्जरी के लिए भर्ती किया गया था, डॉक्टरों ने मरीज की सर्जरी तो कर दी. लेकिन सुबह जब मरीज के परिजन अस्पताल देखने पहुंचे तो पाया कि चुहों ने मरीज की आंख कुतर दी है और पैर के चार उंगलियां भी खा गए हैं.

    वहीं घटना को लेकर बताया जा रहा कि मरीज को डायबिटीज के कारण दर्द का अहसास नहीं हुआ, इसलिए उसे पता ही नहीं चला कि यह घटना कब हुई. सुबह जब लोगों ने यह घटना देखी, तो उन्हें चूहों की इस करतूत का पता चला. सबसे गंभीर बात यह है कि एनएमसीएच में प्लास्टिक सर्जरी विभाग नहीं है, जिसके कारण कटी उंगलियों का सही तरीके से इलाज नहीं हो सका.

    भर्ती मरीज का 10 साल पहले कट चुका है पैर

    मरीज का एक पैर 10 साल पहले ही कट चुका है. अब चूहों ने दूसरे पैर की उंगलियां कुतर दी हैं, जिससे उसके चलने की उम्मीद भी लगभग खत्म हो गई है. उंगलियों में ताकत न होने के कारण वह पूरी तरह से लाचार हो सकता है.

    सफाई पर उठाए कई गंभीर सवाल

    हालांकि यह पहली बार नहीं है, जब एनएमसीएच में चूहों ने आतंक मचाया हो. इससे पहले 16 नवंबर 2024 को नालंदा से रेफर किए गए एक युवक की मौत के बाद रात में उसकी एक आंख गायब मिली थी. तब भी आशंका जताई गई थी कि चूहे उसकी आंख खा गए. इन घटनाओं ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और साफ-सफाई पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

    प्रशासन ने इस गंभीर समस्या को नजरअंदाज किया

    एनएमसीएच प्रशासन अस्पताल और वार्डों में चूहों के आतंक से वाकिफ है, लेकिन अब तक इन्हें रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं. करीब छह महीने पहले जब नालंदा के एक युवक की मौत हुई और उसकी आंख गायब मिली और शक चूहों पर गया, तब भी कोई कार्रवाई नहीं की गई. न तो चूहों को मारने के लिए कोई उपाय किए गए और न ही अस्पताल में साफ-सफाई व्यवस्था को दुरुस्त किया गया.

    यहां तक ​​कि उस घटना के बाद जिस नर्स को निलंबित किया गया था, उसे कुछ समय बाद वापस नौकरी पर रख लिया गया. इससे साफ है कि प्रशासन ने इस गंभीर समस्या को नजरअंदाज किया है.


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