झारखंड के थानों में आज भी टोटकों के भरोसे होती थानेदारी ,सबके अलग -अलग मायने -मतलब 

    झारखंड के थानों में आज भी टोटकों के भरोसे होती थानेदारी ,सबके अलग -अलग मायने -मतलब 

    धनबाद(DHANBAD) | साल '2023 बीतने  को है. अब 2024 आएगा. 2024 के पहले दिन थानों में संगीन धाराओं में मुक़दमा करने से थानेदार परहेज कर सकते हैं . 1984 -85 में भी सुना जाता था कि थाना परिसर में लाठी गिरना अपशकुन  पुलिस वाले मानते है.  कहा जाता था कि लाठी गिरने से थाना क्षेत्र में कोई अपराध की बड़ी घटना हो जाती है.  जिस पुलिसकर्मी या व्यक्ति से लाठी गिरी होती, उसे फटकार भी मिलती थी.  लेकिन यह टोटका आज भी माना जाता है.  दैनिक भास्कर में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार आज के युग में भी पुलिस इन टोटकों  पर विश्वास करती है. 

    टोटकों को आज भी उतने ही भरोसे से मानते हैं  पुलिस वाले 

     इन टोटकों  का थानों में पालन भी होता है.  निश्चित रूप से इन टोटकों  का प्रचलन 80 के दशक के पहले से ही है.  उसके बाद न जाने कितने बैच  के दरोगा और पुलिसकर्मी बहाल हुए,समय कितना बदला   लेकिन इन टोटकों का प्रचलन आज भी जारी है.  छपी खबर के मुताबिक स्टेशन डायरी और एफआईआर की  कॉपी को आपस में सटने  को भी अपशकुन माना जाता है.  कहा जाता है कि ऐसा होने से थाने की परेशानी बढ़ सकती है. इलाके में अपराध का ग्राफ भी बढ़ सकता है.  एक टोटका यह भी माना जाता है कि थाना प्रभारी की कुर्सी हिलनी - डुलनी नहीं चाहिए.  अगर किसी कारण बस कुर्सी हिल गई तो उथल-पुथल हो सकती है.  थानेदारी भी जा सकती है. 

    जानिए लाठी गिराने को क्या अशुभ माना जाता है 

     पुलिस विभाग में यह भी  माना जाता है कि थाने में कलम या लाठी गिरने से अचानक उस थाना क्षेत्र में कोई बड़ी अपराध की घटनाएं हो जाती है.  जिस पुलिसकर्मी से लाठी  या कलम गिरते  है, उसे डांट मिलती है.  आगे ऐसा नहीं करने की चेतावनी भी दी जाती है. छपी  खबर के मुताबिक हाजत को शुभ मानकर स्वच्छ रखा जाता है.  ऐसा माना जाता है कि हाजत  में अगर किसी कैदी के साथ कुछ भी अशुभ हुआ तो थानेदार या इन्वेस्टिगेटिंग ऑफीसर की परेशानी बढ़ सकती है.  गिरफ्तार आरोपी को हाजत  में जाने के पहले चप्पल,जूता  खुलवा दिया जाता है.  बात इतनी भर नहीं है, साल के पहले दिन संगीन  धाराओं के तहत प्राथमिक  दर्ज करना भी थानों में अशुभ माना जाता है.  कहा जाता है कि वर्ष का पहला दिन इस तरह की घटनाओं का दर्ज होना शुभ नहीं है. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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