एक युग का अंत: दिशोम गुरु ने झारखंड आंदोलन के प्रहरी से जननायक तक का सफर कुछ यूं किया था तय !

    एक युग का अंत: दिशोम गुरु ने झारखंड आंदोलन के प्रहरी से जननायक तक का सफर कुछ यूं किया था तय !

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : दिशोंम गुरु शिबू सोरेन के निधन से आज झारखंड के हर एक व्यक्ति की आंखें नम है. आज झारखंड ने न सिर्फ एक जननायक खोया है, बल्कि आज लोगों ने एक पथप्रदर्शक को भी खो दिया है. ऐसे में राज्य में गुरुजी के योगदान को गिनाया नहीं जा सकता और आज जिस झारखंड में हम रह रहे हैं, उसकी कल्पना भी शायद दिशोंम गुरु के बिना पूरी नहीं हो सकती थी. 

    एक नज़र डालते हैं, उनके जीवन के कुछ प्रमुख तारीख की तरफ. 

    11 जनवरी 1944 : जन्म नेमरा गांव में हुआ, रामगढ़ (तत्कालीन हजारीबाग), झारखंड (तत्कालीन बिहार).

    1972 :  पिता शोभराम सोरेन की हत्या हुई, जिसके बाद शिबू ने सामाजिक और राजनीतिक दुनिया में कदम रखा था. 

    23 जनवरी 1975 : झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की स्थापना की थी. 

    15 नवंबर 2000 : झारखंड राज्य का गठन हुआ, जिसमें शिबू सोरेन के आंदोलन की अहम भूमिका रही थी.

    27 मई 2004 से 2 मार्च 2005 : पहली बार शिबू सोरेन झारखंड के मुख्यमंत्री बने.

    30 अगस्त 2008 से 12 जनवरी 2009 : दूसरी बार गुरूजी मुख्यमंत्री बने.

    30 दिसंबर 2009 से 31 मई 

    2010 :  तीसरी बार गुरूजी मुख्यमंत्री बने.
    1980, 1989, 1991, 1996, 1998, 1999, 2004, 2009 : शिबू सोरेन दुमका से सांसद चुने गए.

    2020 :  राज्यसभा सांसद बने.

    4 अगस्त 2025 : दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई.


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