जामताड़ा के बाद लोहरदगा में हाथियों का उत्पात जारी, तीन महिला समेत चार लोगों की मौत

    जामताड़ा के बाद लोहरदगा में हाथियों का उत्पात जारी, तीन महिला समेत चार लोगों की मौत

    लोहरदगा (LOHARDAGA) :  लोहरदगा जिला के कुडू थाना क्षेत्र के मसियातू में रविवार शाम एक जंगली हाथी ने मसियातु गांव निवासी एक महिला मुनिया देवी को चपेट में लेते हुए उसे मौत के घाट उतार दिया. वहीं भंडरा थाना क्षेत्र में हाथियों के झुंड ने दो महिला समेत तीन लोगों की जान ले ली. जिसमें झालो उराईन,नेहा उर्फ सुकून उराईन और लालमन महतो शामिल हैं. 

    वन विभाग अभी भी सुस्त

    कुडू थाना क्षेत्र में हाथी के हमले को लेकर मिली जानकारी के अनुसार रविवार की शाम जंगल से भटक कर हाथी अचानक मसियातु गांव पहुंच गया. जहां जंगल की ओर गई महिला मुनिया देवी को हाथी ने कुचल दिया. किसी प्रकार महिला को ग्रामीणों के सहयोग से इलाज के लिए अस्पताल लाया गया. जहां इलाज के दौरान इसकी मौत हो गई. हाथी के गांव में घुसने से ग्रमीणों के बीच दहशत फैली हुई है. ग्रामीण अपने स्तर से हाथी को जंगल की ओर खदेड़ने में का प्रयास कर रहे है. इधर खबर लिखे जाने तक वन विभाग की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया. बन विभाग की इस लेट लतीफी के कारण ग्रामीणों में काफी आक्रोश है.

    रविवार सुबह जामताड़ा में भी हुई एक की मौत

    वहीं जिले के जामताड़ा थाना क्षेत्र के चलना पंचायत में जंगली हाथी के हमले से रविवार सुबह भी एक की मौत हुई थी. गांव में अचानक हाथियों का झुंड घुस आया और एक व्यक्ति मनोज बास्की को कुचल कर मौत के घाट उतार दिया. घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने गांव भर में खुद हंगामा किया. सूचना पर विधायक इरफान अंसारी गांव पहुंचे और ग्रामीणों को समझा बुझाकर शांत किया. इसी बीच पुलिस और वन विभाग की टीम भी घटनास्थल पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया.

    बीते पांच सालों में 462 लोगों की मौत

    मीडिया रिपोर्ट से अनुसार झारखंड में इस साल जनवरी महीने में ही हाथियों के हमले में पांच लोगों की जान चली गई. आरटीआई के तहत मिली जानकारी के जवाब में पर्यावरण मंत्रालय ने बताया कि साल 2017 से अब तक हाथियों के हमले में झारखंड में ही 462 लोगों की जान गई है. वहीं बीते साल 2022 में हाथियों के हमले से 133 लोगों की मौत हुई थी. ऐसे में कहा जा सकता है कि हाथियों के हमले से हो रहे मौत के आकड़ों में कोई कमी नहीं आई है. हालांकि इन घटनाओं के कारणों की बात करें तो इसका जिम्मेदार हाथियों के गुड़रने वाले कॉरिडोर्स पर अतिक्रमण, जंगली जानवरों के लिए घटता खाना और रहने की जगह, जंगल में आग लगने की घटनाएं और माओवादी और सुरक्षाबलों के बीच लगातार मुठभेड़ की घटनाएं हो सकती हैं. हालांकि राज्य सरकार के अनुसार, राज्य में 2015 से 2021 के बीच वनक्षेत्र 23,478 वर्गकिलोमीटर से बढ़कर 23,716 वर्ग किलोमीटर तक बढ़ गया है. लेकिन इसके बावजूद इंसानों और जंगली जानवरों के बीच संघर्ष की घटनाएं घटी नहीं बल्कि बढ़ी हैं. 

    रिपोर्ट : गौतम लेनिन, लोहरदगा


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