झारखंड में हाथी का आतंक, विधानसभा में हुई चर्चा, 25 लाख मुआवजा की मांग


रांची(RANCHI): झारखंड में हाथी के उत्पाद से मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है. मौत से राज्य कराह रहा है. जिसपर अब सदन में चर्चा हुई. इस चर्चा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद जवाब दिया है.इस मामले में विधायक रामेश्वर उरांव ने सरकार से सवाल पूछा.
मंत्री ने सरकार से पूछा कि हाथी के आतंक से इंसान डर और दहशत में है. ऐसे में हाथी और इंसान दोनों को सुरक्षित रखने पर सरकार की क्या व्यवस्था है. आखिर हाथी से मरने वालों को अन्य राज्य 25लाख मुआवाज देता है जबकि झारखण्ड 4लाख दे रहा है. यह सोचना होगा कि आखिर जंगल से हाथी कैसे बाहर निकल रहे है. राज्य में हर दिन मौत हो रही है लेकिन इसके बावजूद कोई सुविधा या टीम राज्य में नहीं है.
इसपर विभागीय मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा कि हाथी से बचाने के लिए विभाग सक्रिय हो कर काम कर रही है. जंगल से हाथी क्यों बाहर आ रहा है क्या जंगल में उनके भोजन का इंतजान नहीं हो रहा है इसपर
भी विचार किया जा रहा है. बास के पेड़ कम हुए है. ऐसे में विभाग से बात चल रही है कि आखिर ऐसा कौन सा पौधा लगाया जाये जिससे कम में ही उनके पेट भरे और वह जंगल से बाहर नहीं आये.
उन्होंने बताया कि सरकार गंभीर है कि कैसे लोगों को बचाया जा सके. इसके लिए बाहर से टीम बुलाई गई है. बाहर की टीम स्थानीय लोगों को भी ट्रेंड कर रही है. जिससे वह भी हाथी से लड़ सके.
इसके साथ ही हाथी के लिए एक चिकित्सालय की भी व्यवस्था की मांग की है. जिसपर भी सरकार काम करेगी.विधायक निर्मल महतो ने भी हाथी के मामले में सवाल उठाया. जिसपर उन्होंने कम से कम 20लाख रूपये मुआवाज देने की मांग की.जिसपर मंत्री ने आश्वासन दिया है कि सभी बिन्दुओ पर चर्चा के बाद इसपर भी पहल किया जायेगा.
वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि समय समय पर परिस्तिथि बदल रही है. ऐसे में जानवर से किसी की जान जा रही है. राज्य में लकड़बाघा,सांप, हाथी और कई अन्य जीव है. जिस वजह से लोगों की जान जा रही है. जिसपर सरकार विचार कर रही है. एक ऐसी व्यवस्था बनाने की कोशिश की जाएगी. जिससे घटना पर सम्बंधित अधिकारी 4घंटे के अंदर घटना स्थल पर पहुंचे और तुरंत राहत पहुंचाने का काम किया जा सके.CM ने कहा कि सरकार जल्द ही इस पर एक ठोस निर्णय के साथ आगे बढे. जिससे राज्य के लोगों के साथ हाथी और अन्य जानवर को भी बचाया जा सके. हम सभी बिंदुओं पर काम कर रहे है.
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