ECL: कोयला प्रोजेक्ट के लिए जमीन देनेवालों के प्रति सॉफ्ट हुआ मैनेजमेंट, नियम बदलाव के बाद प्रक्रिया में भी तेजी !

    ECL: कोयला प्रोजेक्ट के लिए जमीन देनेवालों के प्रति सॉफ्ट हुआ मैनेजमेंट, नियम बदलाव के बाद प्रक्रिया में भी तेजी !

    धनबाद(DHANBAD) | कोल इंडिया की सहायक कंपनियों को   उत्पादन बढ़ाने में सबसे अधिक जरुरत  जमीन की है.  जमीन में विवाद की वजह से कई प्रोजेक्ट रुके हुए रहते है.  कोल इंडिया के सहायक कंपनी ईसीएल  भी इससे प्रभावित है.  ईसीएल  मैनेजमेंट ने जमीन विवाद को खत्म करने की दिशा में तेज पहल शुरू की है.  जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी भी आई है.  जमीन देने वालों को मुआवजा अथवा नौकरी देने के काम को तेजी से आगे बढ़ाने  का काम शुरू हुआ है.  जानकारी के अनुसार इस साल के दिसंबर महीने में कुल 42 जमीन दाताओं को ईसीएल  में नौकरी मिल जाएगी.  बोर्ड की मंजूरी हो चुकी है, सिर्फ कागजी  कार्रवाई बाकी है.  

    जमीन देनेवाले 42 लोगो को दिसंबर महीने में मिलेगी नौकरी 

    जमीन के  बदले नौकरी पाने वाले 42 लोगों को चिट्ठी भेज दी गई है.  21 और 22 नवंबर को ईसीएल  मुख्यालय में उन्हें प्रमाण पत्र और कागज के मूल प्रति के साथ बुलाया गया है.  जांच पूरी होते ही उन्हें नौकरी मिल जाएगी.  मैनेजमेंट का मानना है कि  जमीन के बदले नौकरी अथवा मुआवजे की प्रक्रिया में तेजी लाने से जमीन देने वाले उत्साहित होंगे.  वैसे भी, पश्चिम बंगाल में उद्योगों के लिए जमीन अधिग्रहण करना हिमालय पर चढ़ने के समान है.  ईसीएल  को भी अपनी  कई परियोजनाओं के लिए जमीन की जरूरत है.  इस इलाके में कोयले का विशाल भंडार है.  जमीन अधिग्रहण के बदले नौकरी अथवा मुआवजा नहीं मिलने से आंदोलन होते है.  इससे उत्पादन भी प्रभावित होता है. 

    जमीन अधिग्रहण के बाद नौकरी अथवा मुआवजा नहीं मिलने से होता है विवाद 

    दरअसल, होता यह  है कि  जमीन अधिग्रहण कर ली जाती है, लेकिन न नौकरी मिलती है और न मुआवजा मिलता है.  जिससे  लोगों में निराशा होती है, लेकिन अगर कोल इंडिया और उसकी सहायक कंपनियां जमीन के बदले नौकरी और मुआवजा की प्रक्रिया को तेज कर दे, तो जमीन अधिग्रहण में उसे परेशानी नहीं होगी.  वैसे भी ईसीएल  मुआवजा के लिए आकर्षक योजनाएं लेकर आई है. वैसे भी कुछ महीने पहले ईसीएल  की भूमि अधिग्रहण नीति में बड़ा बदलाव किया गया है.  जिससे अब जमीनदाताओं को ज्यादा मुनाफा मिलेगा. दो एकड़ जमीन पर एक नौकरी देने का प्रावधान है. नौकरी नहीं लेने के एवज में जमीनदाता को उस इलाके की जमीन की सरकारी कीमत के आधार पर रुपये मिलेंगे और साथ ही प्रति एकड़ पांच लाख रुपये के हिसाब से मिलेगा. 

    ईसीएल में नई नीति में जमीन देने वालों के पक्ष में हुए है कई बदलाव 

    नयी नीति में नौकरी नहीं लेने की सूरत में दो एकड़ जमीन पर न्यूनतम 89 लाख और अधिकतम 1.20 करोड़ रुपये भुगतान का नियम लागू किया गया है. न्यूनतम और अधिकतम राशि उस इलाके की जमीन की कीमत के आधार पर तय होगी. इसके अलावा दूसरी पॉलिसी के तहत जमीनदाता यदि एकमुश्त जमीन का पैसा नहीं लेता है और नौकरी भी नहीं लेता है, तो उसे प्रति एकड़ पांच लाख रुपये के साथ अगले 30 वर्षों तक 30 हजार रुपये प्रतिमाह की पेंशन मिलती थी. जिसमें एक प्रतिशत की बढ़ोतरी हर साल होने का नियम था. इस नीति में भी बदलाव किया गया और पेंशन की राशि 44 हजार रुपये से शुरू हुई, जो 45 वर्षो तक दी जायेगी और इसमें हर साल एक फीसदी करके बढ़ोतरी होती जायेगी. उस दरम्यान अगर जमीनदाता की मौत हो जाती है, तो उसके आश्रित को यह पेंशन उतने दिनों तक जारी रहेगी.

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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