दुमका: जान दे देंगे लेकिन जमीन नहीं देंगे, डम्पिंग यार्ड को लेकर ग्रामीण और कंपनी के बीच तकरार

    दुमका: जान दे देंगे लेकिन जमीन नहीं देंगे, डम्पिंग यार्ड को लेकर ग्रामीण और कंपनी के बीच तकरार

    दुमका (DUMKA) : झारखंड में ज्यादातर जमीन आदिवासियों का है. ऐसे में कोई भी सरकारी काम के लिए उनके जमीनों का इस्तेमाल किया जाता है. वही अब दुमका में रेलवे स्टेशन पर कोल्ड डंपिंग यार्ड के लिए आदिवासियों के जमीन को लेकर कंपनी मांग कर रही है. इसके लिए कंपनी ग्राम सभा कर रही है. मगर आदिवासियों का एक ही कहना है कि वह किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं देंगे. दुमका जिला के शिकारीपाड़ा प्रखंड स्थित हरिनसिंगा रेलवे स्टेशन को लेकर है. जहां कोल डंपिंग यार्ड के लिए बीजीआर नामक कम्पनी को काम मिला है. पर इसके लिए शुक्रवार को कंपनी को सरसडंगाल और हुलसडंगाल में ग्राम सभा करना था. शिकारीपाड़ा सीओ कपिलदेव ठाकुर ,थाना प्रभारी वकार हुसैन के साथ साथ काफी संख्या पुलिस बल के साथ कम्पनी पहले सरसडंगाल पहुंचे. लेकिन पर वहां ग्राम सभा के लिए कोई ग्रामीण मौजूद नहीं थे. 

    अधिकारियों की टोली का ग्राम सभा

    नतीजा वहां से कंपनी के अधिकारी और प्रखंड के पदाधिकारी वापस लौट गए. उसके बाद अधिकारियों की टोली ग्राम सभा करने के लिए हुलसडंगाल पहुंचे. हुलसडंगाल में लोगों की काफी भीड़ जमा थी परंतु सभी लाठी डंडे से लैस थे. जब अधिकारी ग्रामीणों के नजदीक पहुंचे तो ग्रामीणों ने उनसे किसी तरह की बातचीत करने से इनकार कर दिया.  उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि आप यहां से वापस चले जाएं.  हमें अपनी जमीन देनी ही नहीं है. 

    गांव वालों की मर्जी के बाद निर्णय

    ज्ञात हो कि 29 सितंबर को बीजीआर कंपनी के कोल साइडिंग शुरू करने को लेकर शिकारीपाड़ा प्रखंड सभागार में एसडीओ कौशल कुमार की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित हुई थी. जिसमें सीओ, कंपनी के अधिकारी, तीनो जिला परिषद के सदस्य, प्रखंड प्रमुख, पंचायत के मुखिया समेत काफी संख्या में लोगों ने भाग लिया था. यहां भी पंचायत प्रतिनिधियों ने यही कहा था कि गांव वालों की मर्जी के बाद ही कोई निर्णय ले सकते हैं. 

    अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं

     06 अक्टूबर का दिन गांव वालों के साथ बैठक करने के लिए तय किया गया था लेकिन शुक्रवार को ग्रामीणों के विरोध के कारण ग्राम सभा नहीं हो पाई. बीजीआर कंपनी के अधिकारी और प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी को खाली हाथ वापस लौटना पड़ा। इस पूरे मामले पर कोई भी अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हुए.ऐसे में जिस तरह ग्रामीणों का विरोध है उससे समझा जा सकता है कि बीजीआर कंपनी को हरिनसिंगा में कोल डंपिंग यार्ड शुरू करने में काफी मशक्कत का सामना करना पड़ सकता है.

    रिपोर्ट: पंचम झा 


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