दुमका: अंधविश्वास ने ली एक और जान, डायन बताकर विधवा की पीट-पीटकर हत्या

    दुमका: अंधविश्वास ने ली एक और जान, डायन बताकर विधवा की पीट-पीटकर हत्या

    दुमका(DUMKA):एक ओर दुनिया विज्ञान और विकास की नई ऊंचाइयों को छू रही है, इंसान चांद पर नई दुनिया बसाने के सपने देख रहा है, वहीं दूसरी ओर समाज के कुछ हिस्सों में आज भी अंधविश्वास इस कदर जड़ें जमाए हुए है कि लोग इंसानियत को भूलकर खून के प्यासे हो जाते है. डायन बिसाही जैसी कुप्रथा आज भी कई निर्दोष लोगों की जान ले रही है.

    डुमरसोल गांव से दिल दहला देने वाली घटना

    झारखंड की उपराजधानी दुमका के मुफस्सिल थाना क्षेत्र अंतर्गत डुमरसोल गांव में अंधविश्वास की भयावह तस्वीर सामने आई है.यहां डायन होने के आरोप में एक युवक ने गांव की विधवा महिला पक्कू हेंब्रम की बेरहमी से पीट पीटकर हत्या कर दी.

    संतान न होने का गुस्सा बना हत्या की वजह

    जानकारी के अनुसार आरोपी मुंशी टुडू की शादी करीब दस वर्ष पहले हुई थी. शादी के कई वर्षों बाद भी वह पिता नहीं बन सका, जिसके बाद उसकी पत्नी उसे छोड़कर चली गई.बीते वर्ष उसके पिता की भी मृत्यु हो गई.इन घटनाओं के लिए वह पड़ोस में रहने वाली विधवा महिला को जिम्मेदार मानने लगा था.

    अंधविश्वास में महिला को मान बैठा डायन

    आरोपी के मन में यह धारणा घर कर गई थी कि महिला डायन है और उसी के कारण उसका परिवार बर्बाद हो गया. वह यह भी मानता था कि महिला जब भी उसे टोका करती थी, उसके सारे काम बिगड़ जाते थे. इसी सोच ने उसके भीतर नफरत को जन्म दिया.

    बहाने से घर बुलाकर कर दी हत्या

    सोमवार की शाम आरोपी ने महिला को बहाने से अपने घर बुलाया. वहां उसने लकड़ी के डंडे से महिला पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया.गंभीर चोट के कारण महिला की मौके पर ही मौत हो गई. घटना की सूचना गांव के चौकीदार ने पुलिस को दी.इसके बाद मुफस्सिल थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और भागने की कोशिश कर रहे आरोपी मुंशी टुडू को गिरफ्तार कर लिया.

    हत्या में प्रयुक्त डंडा बरामद, आरोपी को भेजा गया जेल

    थाना प्रभारी ने बताया कि डायन होने के शक में महिला की हत्या की गई है. हत्या में इस्तेमाल लकड़ी का डंडा भी बरामद कर लिया गया है. मृतका की बेटी मकलू हांसदा के बयान पर मामला दर्ज कर आरोपी को मंगलवार को जेल भेज दिया गया.

    समाज के लिए चेतावनी

    यह घटना केवल एक हत्या नहीं, बल्कि समाज में फैले अंधविश्वास और अशिक्षा का भयावह चेहरा है. जरूरत है जागरूकता, शिक्षा और कानून के सख्त पालन की, ताकि किसी निर्दोष की जान यूं न जाए.

    रिपोर्ट-पंचम झा



    Related News