Dumka Seat Result: 6 में से 4 विधानसभा क्षेत्र में बढ़त, फिर भी क्यों हार गई सीता सोरेन, पढ़ें वजह

    Dumka Seat Result: 6 में से 4 विधानसभा क्षेत्र में बढ़त, फिर भी क्यों हार गई सीता सोरेन, पढ़ें वजह

    दुमका(DUMKA):लोकसभा चुनाव 2024 सम्पन्न हो गया. देश के साथ साथ दुमका लोकसभा क्षेत्र का परिणाम आ चुका है. झामुमो प्रत्याशी नलीन सोरेन ने बीजेपी प्रत्याशी सीता सोरेन को 22527 मतों से पराजित कर दिया. जिला निर्वाची पदाधिकारी ए दोड्डे ने नलीन सोरेन को जीत का प्रमाण पत्र सौप दिया. नलीन सोरेन के रूप में दुमका को अपना सांसद मिल गया.अब चौक चौराहे पर जीत और हार की समीक्षा हो रही है. 

    6 में से 4 विधानसभा पर बीजेपी प्रत्याशी को मिली बढ़त

     दुमका लोकसभा क्षेत्र में कुल 6 विधानसभा क्षेत्र आता है. शिकारीपाड़ा, जामा, दुमका, नाला, जामताड़ा औऱ सारठ.चुनाव परिणाम को देखें तो वर्ष 2019 के चुनाव में दुमका, नाला, जामा और सारठ विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी को लीड मिली थी, जबकि शिकारीपाड़ा और जामताड़ा विधानसभा में झामुमो का लीड था. 4 विधानसभा में लीड लाने के बाद बीजेपी प्रत्याशी सुनील सोरेन ने झामुमो प्रत्याशी शीबू सोरेन को 47590 मतों से पराजित कर सांसद बने थे.2024 के चुनाव परिणाम को देखें तो इस बार भी बीजेपी नाला, दुमका, जामा और सारठ विधानसभा क्षेत्र में बढ़त बनाने में सफल रही, इसके बाबजूद पार्टी प्रत्याशी सीता सोरेन को पराजय का सामना करना पड़ा.वहीं 6 में से मात्र शिकारीपाड़ा और जामताड़ा विधानसभा में लीड लेने के बाबजूद झामुमो प्रत्याशी नलीन सोरेन ने 22527 मतों से जीत दर्ज कर पार्टी की झोली में दुमका सीट वापस कर दिया. 

    एक नजर में देखें विधानसभा वार बढ़त 

     बीजेपी को सबसे ज्यादा अपेक्षा नाला विधानसभा पर था. वर्ष 2019 में नाला में बीजेपी को 33850 मतों की बढ़त मिली थी तो इस बार लगभग 21 हजार पर ही सिमट गया. जामा विधानसभा की बात करे  तो 2019 में पार्टी को लगभग 8 हजार की बढ़त थी, जो इस बार घटकर लगभग 67 सौ, वो भी तब जब जामा विधानसभा का झामुमो के टिकट पर 3 बार प्रतिनिधित्व करने वाली सीता सोरेन बीजेपी प्रत्याशी बनकर मैदान में थी.सारठ विधानसभा में 2019 में बीजेपी को लगभग 21 हजार की लीड थी, जो इस बार घटकर लगभग 1100 पर सिमट गया.पिछले लोकसभा चुनाव में रणधीर सिंह वहां के विधायक थे और इस बार के चुनाव में भी विधायक हैं.फर्क इतना है कि पिछले चुनाव में रणधीर सिंह विधायक के साथ साथ मंत्री भी थे.वहीं दुमका विधानसभा की बात करें तो 2019 में बीजेपी को 9865 वोट की बढ़त थी, इस बार 10 हजार से कुछ ज्यादा है. पिछले चुनाव में लुइस मरांडी दुमका विधानसभा क्षेत्र की विधायक होने के साथ साथ सरकार में मंत्री भी थी, जबकि इस बार के चुनाव में पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में लुइस मरांडी ने जमकर पसीना बहाया था. 

    शिकारीपाड़ा और जामताड़ा में झामुमो को मिली निर्णायक बढ़त 

    वहीं शिकारीपाड़ा विधान सभा को देखें तो 2019 में यहां से झामुमो को 8840 मतों की बढ़त थी, जो इस बार बढ़कर 25 हजार से ज्यादा पहुंच गया. वहीं जामताड़ा में 2019 में झामुमो को लगभग 16 हजार की लीड थी, जो बढ़कर 38 हजार पहुंच गया. इस तरह शिकारीपाड़ा और जामताड़ा में झामुमो को मिले निर्णायक बढ़त ने पार्टी प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित कर दी. शेष 4 विधानसभा में बीजेपी को लीड मिलने के बाबजूद सीता को पराजय का सामना करना पड़ा. जिस तरह सारठ, नाला और जामा विधानसभा क्षेत्र में पार्टी को 2019 के मुकाबले लीड कम हुआ उससे कई सवाल खड़े होते हैं.सवाल उठता है कि क्या रणधीर सिंह की क्षेत्र में पकड़ कम हुई है या उन्होंने इस चुनाव को गंभीरता से नहीं लिया.

     क्यों नलीन सोरेन का मुकाबला नहीं कर पायी सीता सोरेन 

    जामा विधानसभा से 3 बार झामुमो के टिकट पर विधायक बनने वाली सीता सोरेन को 2019 के मुकाबले लीड बढ़नी चाहिए थी, क्योंकि बीजेपी के वोटर के साथ साथ सीता सोरेन की भी व्यक्तिगत पैठ तो होगी ही, फिर क्यों लीड घट गया.नाला विधान सभा पर बीजेपी को सबसे ज्यादा भरोसा था.2019 यहां का बढ़त बीजेपी के लिए जीत का मार्ग प्रसस्त किया था. चुनाव जीतने के बाद सांसद के रूप में सुनील सोरेन हमेशा नाला क्षेत्र का दौरा कर लोगों की समस्या का समाधान भी करते थे. इसके बाबजूद बीजेपी के नाम पर वहां का लीड इस बार लगभग 12 हजार घट गया.इस चुनाव परिणाम पर बीजेपी को गहन चिंतन की जरूरत है.

     रिपोर्ट-पंचम झा 


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