दुमका:विधायक प्रदीप यादव का बीजेपी पर हमला, कहा झारखंड में सत्ता से अलग होने की तड़प इनसे बर्दाश्त नहीं हो रही है  

    दुमका:विधायक प्रदीप यादव का बीजेपी पर हमला, कहा झारखंड में सत्ता से अलग होने की तड़प इनसे बर्दाश्त नहीं हो रही है   

    दुमका(DUMKA):झारखंड की सियासत में समय समय पर तूफान आता है.कभी राजभवन का लिफाफा बम फूटने के नाम पर तो कभी ईडी की कार्रवाई के नाम पर सीएम की कुर्सी डगमगाने लगती है. पल पल बदलते राजनीतिक घटनाक्रम को देख कर ऐसा लगता है, मानो आज सरकार का आखरी दिन हो. कल क्या होगा कोई नहीं जानता. राजनीति की विसाद पर शह और मात का खेल जारी है. इस सब के बीच बेचारी जनता मूक दर्शक बन कर रह जाती है. मीडिया को मसाला मिल जाता है, और सरकार के वैकल्पिक स्वरूप की कल्पना सबके सामने परोसा जाने लगता है. विकास के कार्य पीछे छूट जाते है.

    कई सफेदपोश और रसूखदारों पर धीरे धीरे ईडी अपना शिकंजा कसता जा रहा है

    वहीं खनन घोटाले के कई किरदार सलाखों के पीछे पहुंच चुके है. कई सफेदपोश और रसूखदारों पर धीरे धीरे ईडी अपना शिकंजा कसता जा रहा है. सत्ता पक्ष इसे केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय एजेंसी का दुरुपयोग करार देती है, तो बीजेपी का मानना है कि जब सीएम ने कोई गलती नहीं कि है तो ईडी का सामना क्यों नहीं करते.

    विधायक प्रदीप यादव ने बेबाकी से कहा कि इंडिया गठबंधन के तमाम विधायक एकजुट हैं

    वहीं इस सबके बीच दुमका पहुंचे गोड्डा के पोड़ैयाहाट से कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव ने बेबाकी से कहा कि इंडिया गठबंधन के तमाम विधायक एकजुट हैं. हेमंत सोरेन कल भी सीएम थे, आज भी हैं और कल भी रहेंगे. बीजेपी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड में भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से अलग होने की तड़प बर्दाश्त नहीं हो रही है. उनके जो नेता है जिनको लगता है कि हम जल्दी से उस कुर्सी पर आसीन हो जाए, वह तड़प उनको बर्दाश्त नहीं हो रहा है. इसी वजह से देश में शीर्ष पर बैठे हुए लोग जो संवैधानिक संस्थाएं हैं, उसका दुरुपयोग करते हुए इस पूरे राज्य में एक माहौल पैदा कर रही है, ताकि सरकार के जो विकास के कार्य है वह पर्दे के पीछे चले जाएं और एक भ्रष्टाचार का माहौल राज्य की जनता के सामने आए. उसी के लिए तरह तरह की कहानियां गढ़ी और परोसी जाती है.

    ईडी से पहले उनके नेता के बयान आ जाते हैं. ईडी की कार्यवाई क्या होनी चाहिए

    वहीं ईडी बाद में आती है उसके पहले उनके नेता के बयान आ जाते हैं. ईडी की कार्यवाई क्या होनी चाहिए डायरेक्शन देने लगते हैं. यह तमाम चीजें हमें लगता है कि उस सत्ता के लिए है. उन्होंने कहा कि जहां जहां इनकी सत्ता नहीं रही और जहां जहां चुनाव नजदीक हुए इसी प्रकार इन संस्थाओं का दुरुपयोग हुआ. आपने देखा एक समय राजस्थान और छत्तीसगढ़ में उस समय तक रोज छापे होते थे, अब झारखंड की बारी है. यह 2024 तक चलेगा और झेलना पड़ेगा विरोधी दलों को. उसी का एक सीन क्रिएट किया जा रहा है. मकशद बस एक ही है कि कैसे राज्य सरकार अस्थिर हो जाए. समर्थकों में लगे कि अस्थिरता पैदा हो गया. कैसे विधायक छिन्न भिन्न हो जाए. उसके भी अंदर अंदर प्रयास किए गए, लेकिन यहां इनकी नहीं चलनेवाली है, क्योंकि सत्ता पक्ष के तमाम विधायक एकजुट हैं.

    रिपोर्ट-पंचम झा


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