दुमका:फसलों को बर्बाद होता देख फटा अन्नदाताओं का कलेजा! फावड़ा और कुदाल लेकर करने लगे चेक डैम का निर्माण,पढ़ें पूरा मामला  

    दुमका:फसलों को बर्बाद होता देख फटा अन्नदाताओं का कलेजा! फावड़ा और कुदाल लेकर करने लगे चेक डैम का निर्माण,पढ़ें पूरा मामला   

    दुमका(DUMKA):भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहां की कृषि मानसून आधारित मानी जाती है.आजादी के बाद से ही किसानों के उत्थान के लिए केंद्र से लेकर राज्य सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई गई, इसके बाबजूद आज भी चुनाव के वक्त हर खेत तक पानी पहुंचाने का वादा चुनावी मुद्दा बनता है.यह चुनावी वादा दर्शाता है कि हर खेत तक सिंचाई सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाया है.ऐसी स्थिति में सवाल उठता है कि किसान क्या करें?

    ये नजारा राज्य के निवर्तमान कृषि मंत्री बादल पत्रलेख के विधान सभा क्षेत्र जरमुंडी का है

    मानसून के सहारे खेतों की हरियादी देख कर किसानों के चेहरे भले ही खिल जाए लेकिन इन खिले चेहरों के अंदर चिंता की एक लकीर भी होती है.लहलहाते फसल को मुरझाते देख किसानों का कलेजा फटने लगता है.फसल को बचाने के लिए वे पहले तो आरजू मिन्नतें करते हैं.जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक फरियाद करते हैं,लेकिन जब इनकी बातें अनसुनी कर दी जाती है, तो हाथों में फावड़ा और कुदाल लेकर निकल पड़ते है अपने फसल को बचाने. ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है राज्य के निवर्तमान कृषि मंत्री बादल पत्रलेख के विधान सभा क्षेत्र जरमुंडी में.

    नदी से लगातार बालू उठाव के कारण किसानों के समक्ष गंभीर समस्या उत्पन्न हो गयी

     दुमका जिला के जरमुंडी प्रखंड स्थित पेटसार पंचायत के नामीवरण और घोंघाठेकचा के ग्रामीण श्रमदान के सहारे मोतीहारा नदी में पानी रोकने के लिए चेक डैम का निर्माण कर रहे हैं.ग्रामीण बताते हैं कि कई बार जनप्रतिनिधि से लेकर अधिकारी तक चेक डैम निर्माण के लिए आवेदन दिया, लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकलने के कारण लोग अपने से चेक डैम का निर्माण कार्य शुरू कर दिए, उनका कहना है कि पहले नदी में बालू रहता था तो ड्रम की मदद से पानी इकट्ठा कर खेती कर लेते थे,लेकिन नदी से लगातार बालू उठाव के कारण किसानों के समक्ष गंभीर समस्या उत्पन्न हो गयी.पानी नहीं रहने के कारण चेक डैम निर्माण करने की जरूरत पड़ गई.ग्रामीणों का यह भी कहना है कि माइनर इरिगेशन से स्थल निरीक्षण के लिए टीम भी आयी थी, लेकिन उसके बाद कुछ नहीं हुआ.

    समस्या यथावत रहने के कारण ग्रामीण अपने से चेक डैम निर्माण का कार्य कर रहे हैं

    गांव के बुजुर्ग हरी मांझी का कहना है अभी तो खेत हरा भरा दिख रहा है लेकिन यदि किसान श्रमदान ना करे तो यह हरियाली कुछ दिनों का मेहमान साबित होगा.ग्रामीण शीतल का कहना है कि अधिकारी से लेकर जनप्रतिनिधि तक कई बार समस्या से अवगत कराया गया लेकिन समस्या यथावत रहने के कारण ग्रामीण अपने से चेक डैम निर्माण का कार्य कर रहे हैं. उनका कहना है कि चेक डैम बन जाने से लगभग आधा दर्जन गांव के किसान को कृषि कार्य करने में सुविधा होगी.

    यदि हर खेत तक सिंचाई की सुविधा उपलब्ध करा दिया जाए तो क्षेत्र खुशहाल हो जाएगा

    इस पूरे मामले पर प्रखंड विकास पदाधिकारी नीलम कुमारी का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है, यदि ग्रामीणों द्वारा आवेदन दिया जाता है, तो समस्या के समाधान की दिशा में सार्थक पहल की जाएगी.दुमका जिला का जरमुंडी, सरैयाहाट प्रखंड कृषि प्रधान क्षेत्र है, यदि इन प्रखंडों में हर खेत तक सिंचाई की सुविधा उपलब्ध करा दिया जाए तो क्षेत्र खुशहाल हो जाएगा. किसानों की आर्थिक उन्नति होगी.बादल पत्रलेख के कृषि मंत्री बनने के बाद लोगों की अपेक्षा बढ़ी थी, लेकिन अपनी अपेक्षाओं पर तुषारापात होता देख किसान कुदाल और फावड़ा उठाकर दिन रात मेहनत कर रहे है ,ताकि खेतों में फसल लहलहाती रहे और इनके चेहरे पर मुस्कान कायम रहे.

    रिपोर्ट-पंचम झा


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