CHAIBASA: हाथियों का उत्पात-एक व्यक्ति की मौत, दूसरे ने भाग कर बचाई जान


चाईबासा(CHAIBASA): झारखंड में हाथियों के जंगल से भटक जाने और आबादी की ओर आ जाने से हर साल जान और माल का नुकसान होता है. सिंहभूम में सारंडा में हाथी बड़ी संख्या में हैं, लेकिन यहां से वो भोजन की तलाश में इधर-उधर गांवों में अक्सर चले जाते हैं और हादसे को दावत देते हैं. ताजा मामला किरीबुरु थाना के झारखंड-ओडिशा सीमा पर करमपदा और तोपाडीह गांव के बीच बोगदा ढ़लान का है. जहां जंगल मे तोपाडीह गांव निवासी बिमल जक्रियस बारला (35 वर्ष) को हाथियों ने कुचल कर मार डाला, जबकि उसके साथी जामडीह निवासी गोपो जंगल में भागकर जान बचाने में सफल रहे.
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अचानक हाथियों का झुंड आ गया सामने
यह घटना 28 जून की रात लगभग सात से आठ बजे के बीच की बताई जा रही है. ग्रामीणों ने बताया कि बिमल अपनी मोटरसाइकल से गोपो नामक युवक के साथ किरीबुरु में सप्ताहिक मंगलाहाट बाजार आया था. यहां से वह बड़बिल स्थित ससुराल चला गया. ससुराल से शाम को वापस किरीबुरु, करमपदा होते अपने गांव तोपाडीह लौट रहा था. तभी ओडिशा सीमा से पहले झारखंड सीमा क्षेत्र में बोगदा कोचा ढ़लान पर हाथियों का झुंड अचानक सामने आ गया. इससे बिमल और गोपो मोटरसाइकल से उतर कर भागने लगे. गोपो जंगल में भागकर जान बचाने में सफल रहा, लेकिन बिमल को एक हाथी ने कुचलकर मार डाला. जहां यह घटना घटी वहां काफी खराब कच्ची सड़क है.
वन विभाग कराएगा घटना की जांच
करमपदा और तोपाडीह क्षेत्र के ग्रामीण झारखंड-ओडिशा सीमा में आने-जाने के लिए इसी मार्ग का इस्तेमाल करते हैं. बिमल बारला तोपाडीह के सरपंच अनिल बारला का चचेरा भाई था. ओडिशा में बीते दिनों आयोजित पंचायत चुनाव में भी वह पंसस प्रत्याशी के रुप में किस्मत आजमा चुका था. लेकिन उसे हार का सामना करना पड़ा था. उसकी मौत से झारखंड-ओडिशा सीमा क्षेत्र के गांवों में हाथियों को लेकर भय व्याप्त है. सारंडा वन प्रमंडल के एक वन अधिकारी ने बताया कि घटना की जांच वन विभाग के हाथियों के विशेषज्ञ टीम को घटनास्थल पर भेज कर कराई जाएगी. उसके बाद मृतक के आश्रित को पहले तत्कालीन मुआवजा दिलाया जाएगा. फिर कागजी कार्यवाही कर पूर्ण मुआवजा के रुप में 4 लाख रुपये दिलाने की कोशिश की जाएगी. यह भी देखना होगा की घटनास्थल झारखंड में है या ओडिशा में है.
जानिये झारखंड में हाथियों से नुकसान के आंकड़े
झारखंड में हाथियों के कारण हर वर्ष ग्रामीणों को जान गंवानी पड़ती है। 2021 में सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक गत 11 साल में लगभग 800 लोगों की मौत हाथियों के कारण हुई है. पिछले आठ साल में विभिन्न कारणों से 60 हाथियों की मौत हो चुकी है. पांच हाथियों को तस्करों ने मार डाला, ट्रेन दुर्घटना से चार हाथियों, बीमारी से पांच हाथियों और आठ हाथी की मौत विभिन्न हादसों में हुई. जबकि एक हाथी को वन विभाग के आदेश के बाद 2017-18 में मारा गया था. 14 हाथियों की अप्राकृतिक मौत हुई है. आठ हाथियों की मौत अधिक उम्र हो जाने के कारण हुई है.
रिपोर्ट: संदीप गुप्ता, गुवा (चाईबासा)
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