लोकतंत्र की शक्ति ही है कि मैं यहां तक पहुंची- देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने के बाद द्रौपदी मुर्मू ने कहा

    लोकतंत्र की शक्ति ही है कि मैं यहां तक पहुंची- देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने के बाद  द्रौपदी मुर्मू ने कहा

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK): द्रौपदी मुर्मू ने 25 जुलाई को राष्ट्रपति पद की शपथ ली. इसके साथ ही देश को पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति मिल गई. भारत के इतिहास की सबसे कम उम्र के राष्ट्रपति का रिकार्ड भी उनके नाम से जुड़ गया. वे महज 64 साल की उम्र में राष्ट्रपति बनीं. उन्हें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमणा ( NV RAMANA) ने संसद भवन के सेंट्रल हॉल में राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई. इस दौरान संसद भवन में प्रधानमंत्री मोदी, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला समेत तमाम अहम लोग मौजूद थे.

    दरअसल, सुबह में द्रौपदी मुर्मू अपने आवास से राजघाट पहुंची, वहां उन्होंने महात्मा गांधी को श्रध्दांजलि दी और संसद भवन पहुंचीं. आपको बता दें कि मुर्मू ओड़िसा की रहने वाली है. वो झारखंड की राज्यपाल भी रह चुकी है. इसके अलावा मुर्मू आजादी के बाद जन्मी पहली राष्ट्रपति बनी हैं. उनका जन्म 20 जून 1958 को हुआ है. इस दौरान उन्होंने कहा कि मैं अपने गांव की पहली लड़की थी जो कॉलेज गई थी. उन्होंने कहा कि ये लोकतंत्र की शक्ति ही है की मैं यहां तक पहुंची हूं.      


    the newspost app
    Thenewspost - Jharkhand
    50+
    Downloads

    4+

    Rated for 4+
    Install App

    Our latest news