देवघर के बाजारों में दिवाली की धूम, कुम्भकार हो या दुकानदार सभी की उम्मीद यह दीपावली खुशियों वाली

    देवघर के बाजारों में दिवाली की धूम, कुम्भकार हो या दुकानदार सभी की उम्मीद यह दीपावली खुशियों वाली

    देवघर (DEOGHAR): दीपावली की उल्टी गिनती शुरू हो गई है. पिछले कुछ वर्षो से दीपावली के मौके पर घरेलु सजावट के विदेशी सामानों की बाजार में कमी होने लगी है. जिससे खासकर मिट्टी के वर्तन बनाकर अपनी आजीविका चलाने वाले कुंभकारो के सामने इस वर्ष कई उम्मीद लाई है. बाजार में भी सस्ते दामों पर उपलब्ध होने वाली विदेशी सामानों पर लोगों का खासा झुकाव नही हो रहा है. इस बार कुंभकारों ने अत्यधिक मात्रा में मिट्टी के दीया औऱ वर्तन बना रहे हैं.

    सभी के चेहरे खिले-खिले आ रही नज़र

    मिट्टी के वर्तन बनाकर अपनी आजीविका चलाने वाले कुंभकारों को खासकर दीपावली का सालों भर इंतजार रहता है.सदियों से इनके द्वारा निर्मित मिट्टी के वर्तनो और अन्य सजावटी सामानों द्वारा ही दीपावली के अवसर पर घरों की साज-सज्जा होती रही है.लेकिन पिछले कुछ वर्षों में बाजार में विदेशी सामानों की अचानक बाढ़ सी आ गयी थी. जिनमे खासकर चीन द्वारा निर्मित सामान बाजार में सस्ते दरों पर उपलब्ध होने के कारण स्थानीय कारीगरों के सामने विकट समस्या उत्पन्न हो गयी थी. उस दौरान उनकी माने तो इन विदेशी सामानों से उनकी पुश्तैनी धंधे पर आफत ला दी थी. कोरोना काल के बाद तक मजबूरी में कुंभकार दैनिक मजदूरी कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे थे. लेकिन कोरोना काल के बाद विदेशी सामान की बिक्री भारत में ना के बराबर हो रही है, जिससे कुंभकार को थोड़ी राहत मिली है. साथ ही लोगों का मेड इन इंडिया की ओर झुकाव साफ दिखता है.कुम्भकार भी इस वर्ष बंपर बिक्री की उम्मीद से अपना कार्य कर रहे हैं.

    दुकानदार विदेशी छोड़ स्वदेशी के सामानों से सजा रहे अपने दुकान

    देवनगरी देवघर में इस वर्ष अच्छी बात देखने को मिल रही है. यहाँ के दुकानदार कुंभकारो के साथ नज़र आ रहे हैं. इनकी पीड़ा को समझते हुए दुकानदार दीपावली के अवसर पर एक से बढ़कर एक विदेशी सामान का नही बल्कि मेड इन इंडिया वाली साज सजावट का समान दुकान में रखकर लोगो को आकर्षित कर रहे है. जिला में दीपावली के मौके पर करोड़ो रुपये का कारोबार पिछले वर्ष तक किया जाता रहा है. लेकिन इस बार लोकल फ़ॉर वोकल का मौका है. जिस तरह इस बार बाजारों में विदेशी सामानों की बिक्री कम हो रही है, उससे  यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री का मेक इन इंडिया का नारा कारगर साबित हो रहा है. ऐसे में देश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ कुंभकारो की पुश्तैनी धंधा भी विकसित होगी. तभी तो कह सकते है यह दीवाली सब के लिए खुशियों वाली.

    रिपोर्ट. ऋतुराज सिन्हा


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