कोर्ट फीस बढ़ाए जाने के विरोध में लोहरदगा और जमशेदपुर के वकीलों ने भी बंद रखा काम

    कोर्ट फीस बढ़ाए जाने के विरोध में लोहरदगा और जमशेदपुर के वकीलों ने भी बंद रखा काम

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK): झारखंड सरकार ने विधि विभाग के कोर्ट फीस अधिनियम 2021 का संशोधित प्रस्ताव राज्यभर में लागू कर दिया है. जिसमें सरकार ने न्याय शुल्क को चार गुणा बढ़ा दिया है. कोर्ट फीस में बढ़ोतरी को लेकर राज्यभर में अधिवक्ताओं ने विरोध जताया है. इसी संबंध में सोमवार को जमशेदपुर और लोहरदगा के अधिवक्ताओं ने खुद को न्यायिक कार्य से दूर कर लिया हैं.

    पक्षकारों को उठाना पड़ेगा खामियाजा

    लोहरदगा की बात करें तो सिविल कोर्ट के अधिवक्ताओं ने आज खुद को न्यायिक कार्यों से अलग रहने का फैसला लिया. इसके ‌साथ ही झारखंड सरकार की ओर से गए चार गुणा बढ़ाए गए न्याय शुल्क का जोरदार तरीके से विरोध किया. इस दौरान उन्होंने डीसी को ज्ञापन सौंपा. मौके पर पैनल लॉयर राखा साहू ने कहा की जिस प्रकार फीस की बढ़ोतरी की गई है, इसका पूरा खामियाजा पक्षकारों को उठाना पड़ेगा. वरिष्ठ अधिवक्ता हेमंत सिन्हा ने कहा की राज्य सरकार ने न्याय शुल्क चार गुणा बढ़ाने का कार्य किया है,‌ जिससे सुलभ और सस्ता न्याय मिलना पक्षकारों के लिए समस्या बन गया है.

    वाकियों में नाराजगी

    जमशेदपुर की बात करें तो यहां के भी सभी वकील एक दिनी हड़ताल पर हैं. हड़ताल के साथ इन वकीलों ने धरना भी दिया हैं. यह हड़ताल और धरना राज्य सरकार के फीस वृद्धि के खिलाफ है. याद दिला दें कि राज्य सरकार ने कोर्ट फीस में 5 गुना वृद्धि कर दी है. पहले जिस काम काम के लिए ₹50 हजार रुपये लगते थे, अब उसी काम के लिए ₹3 लाख रुपये देना पड़ेगा. इसके खिलाफ वाकियों में काफी नाराजगी है. वकीलों का कहना है की इससे गरीब तबके के लोगों को न्याय नहीं मिलेगा. पहले से ही इतना ज्यादा मामला है कि लोगों को समय पर न्याय नहीं मिल रहा है, और दूसरी तरफ फीस पढ़ने से और लोगों को न्याय नहीं मिल पाएगा. ऐसे में सरकार अभिलंब की फीस वापस लें.

    किन कामों के लिए कितने पैसों की हुई वृद्धि

    झारखंड सरकार ने विधि विभाग के कोर्ट फीस अधिनियम 2021 का संशोधित प्रस्ताव राज्यभर में लागू कर दिया है. इस संबंध में राज्यपाल रमेश बैस की सहमति के बाद गजट प्रकाशित कर दिया गया है. अब कोर्ट फीस के तहत उत्तराधिकारी प्रमाण की राशि में 10 फीसदी की बढ़ोत्तरी हो गयी है. न्यूनतम 500 रुपये से अधिकतम तीन लाख रुपये तक इसमें शुल्क लिये जायेंगे. राज्य के एक न्यायालय से दूसरे कोर्ट में रिकॉर्ड या अभिलेख मंगाने के लिए आवेदन शुल्क 50 रुपया लिया जायेगा. भारतीय विवाह विच्छेद के लिए आवेदन देने पर 100 रुपये लिये जायेंगे. हाईकोर्ट में शपथ पत्र दायर करने के लिए 30 रुपये और अन्य न्यायालयों के लिए 20 रुपये लिये जायेंगे. उच्च न्यायालय में वकालतनामा दायर करने के लिए अब 50 रुपये शुल्क लगेगा, जबकि निचली अदालत में यह शुल्क 30 रुपये होगा. किसी आदेश का नकल निकालने के लिए 10 रुपये प्रति पृष्ठ के हिसाब से पैसे लिये जायेंगे. कैविएट शुल्क की दर 100 रुपये निर्धारित कर दी गयी है. किसी भी आदेश पर पुनर्विचार करने के लिए पांच सौ रुपये लिये जायेंगे. सिविल प्रक्रिया 1908 के अधीन न्यायालय की राय लेने के लिए दो सौ रुपये देने होंगे. पारसी समुदाय में विवाह विच्छेत के लिए पांच सौ रुपये ज्ञापन देने के नाम पर लिये जायेंगे.

    रिपोर्ट: गौतम लेनिन,लोहरदगा /रंजीत ओझा, जमशेदपुर


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