धनबाद के सांसद, उनके विधायक भाई प्रति टन 1600 रंगदारी के लिए नहीं उठने दे रहे कोयला, पढ़िए किसने लगाया यह बड़ा आरोप!

    धनबाद के सांसद, उनके विधायक भाई प्रति टन 1600 रंगदारी के लिए नहीं उठने दे रहे कोयला, पढ़िए किसने लगाया यह बड़ा आरोप!

    धनबाद(DHANBAD) : सांसद और उनके विधायक भाई के खिलाफ शिकायत करते-करते, अधिकारियों के एक्शन की प्रतीक्षा करते-करते, बरोरा के कोयला डीओ होल्डर कन्हाई चौहान एवं अन्य बुधवार को धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर एक दिवसीय धरना पर बैठे. उनका सीधा आरोप है कि सांसद ढुल्लू  महतो, उनके विधायक भाई शत्रुघ्न महतो प्रति टन  कोयला उठाव पर₹1600 रंगदारी की खुलेआम मांग कर रहे है. नहीं देने पर जान मारने की धमकी दी जा रही है. कोयला उठाने नहीं दिया जा रहा है. इस काम में बीसीसीएल के अधिकारी भी सहयोगी बने हुए है. सांसद के खिलाफ हाथ में तख्तियां लिए कन्हाई चौहान के समर्थक रणधीर वर्मा चौक के धरना स्थल पर जम गए है.

     इसके पहले कन्हाई चौहान ने 3 अप्रैल को सदर अनुमंडल अधिकारी को पत्र लिखकर धरना की अनुमति मांगी थी. पत्र में उन्होंने कहा था कि वह बाघमारा के बरोरा  के रहने वाले है. वह स्वयं, उमेश चौहान बीसीसीएल के डीओ होल्डर है. बीसीसीएल के बरोरा  क्षेत्र संख्या एक के एएमपी कोलियरी, मुराईडीह एवं शताब्दी फुलारीटांड  कोलियरी से डीओ  के माध्यम से कोयले का उठाव करते है. इन कोलियरी से कोयले के उठाव में सांसद ढुल्लू महतो एवं अन्य रंगदारी की मांग कर रहे है. रंगदारी नहीं देने पर जान से मारने की धमकी देते है. जिसकी शिकायत लोकल थाना एवं एसएसपी से भी की गई बावजूद कोई नतीजा नहीं निकला है.  उन्होंने पत्र में कहा कि सांसद के खिलाफ एकदिवसीय धरना की अनुमति प्रदान करे. बता दें कि यह विवाद पहले से चल रहा है. कुछ दिन पहले भी यह विवाद उठा था और कन्हाई चौहान ने आरोप लगाया था कि प्रतिटन  कोयले के उठाव  में 1600 रुपए रंगदारी  की मांग की जा रही है.  

    बुधवार को धरनास्थल पर The Newspost  से बात करते हुए उन्होंने आरोपों  को दोहराया और कहा कि उनके पास सारी बातों के सबूत है. बीसीसीएल के अधिकारियों से संपर्क करने पर कहा जाता है कि जाकर संसद से मिलिए. कन्हाई चौहान ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रति उनकी आस्था है और सरकार को भी शिकायत पत्र भेजा गया है. उन्हें भरोसा है कि रंगदारी पर अंकुश लगेगा और अगर अंकुश नहीं लगता है तो यही माना जाएगा कि झारखंड में कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं है. 

    धनबाद से संतोष की रिपोर्ट 


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