DHANBAD: उफ़! इस कड़कड़ाती ठंड में बिजली संकट, कारण  बताने को कोई तैयार नहीं 

    DHANBAD: उफ़! इस कड़कड़ाती ठंड में बिजली संकट, कारण  बताने को कोई तैयार नहीं

    धनबाद(DHANBAD): ऐसा  माना जाता है कि जाड़े के दिनों में बिजली संकट कम जाती है.  लेकिन धनबाद कोयलांचल में इस कड़कड़ाती  ठंड में हो रहा है इसका उल्टा. इस ठंड के मौसम में बिजली कटौती से लोक परेशान है. जिस रफ़्तार से ठंड बढ़ी है ,उसी स्पीड से बिजली कटौती में भी बृद्धि हुई है. सुबह उठते हैं बिजली गायब. फिर घंटे भर बाद आती है, फिर बिजली गायब हो जाती है. यह  स्थिति पिछले तीन-चार दिनों से बनी हुई है. लोगों को तरह-तरह की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है. एक  घंटे बिजली मिलती है तो डेढ़ घंटे गायब रहती है.  कई क्षेत्रों में तो तकनीकी गड़बड़ी के कारण भी बिजली गुल रहती है. 

    नौ से दस घंटे ही मिल रही बिजली 

    पिछले तीन-चार दिनों से कहा जा सकता है कि 24 घंटे में सिर्फ 9 से 10 घंटे ही बिजली मिल रही है.  बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मौसम बदलने से कई जगहों पर तकनीकी खराबी आ गई है.अंडरग्राउंड केबल में भी खराबी आ गई है. इस कारण लोगों को बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है.  लेकिन बिजली संकट यहां की पुरानी समस्या है. साल का कोई ऐसा महीना नहीं होता, जब बिजली संकट नहीं होती है. सरकार की ओर से घोषणा की जाती है कि जीरो कट बिजली मिलेगी, डीवीसी से निर्भरता कम होगी.  लेकिन यह सब घोषणाएं जमीन पर कब उतरेगी, यह कहना  मुश्किल है. 

    जलापूर्ति भी हो रही बाधित 

    बिजली संकट के कारण जलापूर्ति भी बाधित होती है.  जिनके घरों में मोटर से पानी चढ़ाया  जाता है, उनको तो और अधिक परेशानी हो रही है. बिजली विभाग बिल जमा नहीं करने पर लाइन काट देता है. लोगों का सवाल है कि आखिर बिल जमा करने के बाद भी पूरी बिजली क्यों नहीं मिल रही है. लोगों के इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है. बिजली कटौती का असर धनबाद के पर्यावरण पर भी पड़ता है. कारोबार करने वाले लोगों को जनरेटर पर निर्भर रहना पड़ता है. नतीजा है कि जनरेटर चलने से प्रदूषण भी बढ़ता है और पेट्रोल- डीजल की खपत भी अधिक होती है.  कम से कम जाड़े में इस तरह बिजली कटने की लोगों को उम्मीद नहीं थी, लेकिन बिजली कट रही है.  लोग परेशानी झेल रहे है.  बिजली विभाग की ओर से ऐसा कुछ भी नहीं बताया जाता है, कि  वजह क्या है और स्थिति कब सामान्य होगी. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो



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