DHANBAD!!घर में बैठने से तो पेट नहीं चलेगा ,इसलिए भी जरुरी हो गया है हथियार रखना 

    DHANBAD!!घर में बैठने से तो पेट नहीं चलेगा ,इसलिए भी जरुरी हो गया है हथियार रखना

    धनबाद(DHANBAD) | पहले रिवाल्वर और पिस्तौल का लाइसेंस प्रमंडलीय आयुक्त संबंधित जिले के उपायुक्त की  अनुशंसा पर जारी करते थे.  लेकिन अब इसमें रियायत दी गई है. रिवाल्वर और पिस्तौल का लाइसेंस सीधे जिले के उपायुक्त जारी कर सकते हैं .  वैसे धनबाद में फायरिंग गिरोह की सक्रियता के बाद लाइसेंस लेने वालों की संख्या बढ़ी है.  खुद की सुरक्षा के लिए कारोबारी, डॉक्टर या अन्य पेशे  से जुड़े लोग  हथियार रखना सुरक्षित समझ रहे है.  इस कारण धनबाद उपायुक्त कार्यालय की  सामान्य शाखा में आवेदन अधिक आ रहे है. 
     
    हर महीने लाइसेंस के लिए दस से बारह आवेदन 
     
    हर महीने 10 से 12 आवेदन लाइसेंस के लिए किये जा  रहे है. गैंग्स ऑफ़ वासेपुर की गतिविधियों की वजह से हथियार रखने पर लोगों का फोकस है.  धनबाद की  सामान्य शाखा में आर्म्स लाइसेंस के लिए हर महीने दर्जन भर आवेदन पहुंच रहे है.  व्यवसाईयों की हड़ताल वापस करने के लिए हुई  बातचीत के क्रम में धनबाद के उपायुक्त और एस एसपी में आश्वासन दिया था कि जिन्हें भी हथियार के लाइसेंस चाहिए, वह आवेदन करें ,जल्द ही उनका निष्पादन कर दिया जाएगा.  इस वजह से हथियार के लिए आवेदन करने वालों की संख्या अधिक हुई है. आर्म्स के लाइसेंस के लिए दो सेट में आवेदन करने होते है.  

    आठ पेज के फॉर्म में तीन एनेक्सचर को होता है भरना 

    आठ पेज के फॉर्म में तीन एनेक्सचर है.  उनको भरकर आर्म्स चलाने की ट्रेनिंग सर्टिफिकेट ,अंडरटेकिंग एफिडेविट, मेडिकल सर्टिफिकेट, आईटी रिटर्न, पैन कार्ड, आधार कार्ड के साथ आवेदन करना होता है. अगर फॉर्म में कोई गड़बड़ी नहीं होगी तो इसे एसएसपी कार्यालय को भेजा  जाएगा.  वहां से आवेदक जिस  थाने में रहते  है, वहां जांच के लिए भेजा जाएगा. थाना से जांच के बाद फिर संबंधित डीएसपी कार्यालय के जरिए एसएसपी कार्यालय पहुंचेगा. एसएसपी की  अनुशंसा के बाद आवेदन डीसी कार्यालय को भेजा जाएगा. डीसी की अनुमति के बाद ही लाइसेंस जारी होगा. कुछ करोबारियो  ने पहले से  आवेदन कर रखा है. जिसे प्रशासन ने त्वरित निष्पादन की प्रक्रिया शुरू की है. हथियार रखना क्यों जरूरी हो गया है. चैम्बर  का कहना है कि प्रशासनिक कार्रवाई से फिलहाल वह  संतुष्ट है. उन्हें प्रशासन पर पूरा भरोसा है. गैंग्स की गतिविधियों से डर तो लगता है लेकिन घर में बैठने से तो काम नहीं चलेगा.  कमाने के लिए तो कुछ करना ही होगा.

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो  



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