रेलवे को राजस्व देने में सबसे आगे, पर सुविधा के नाम पर फिसड्डी साबित हो रहा धनबाद रेल मंडल


धनबाद(DHANBAD) : बहुत तामझाम के साथ धनबाद रेलवे स्टेशन के बाहर एक फाउंटेन लगा था. धनबाद के लोग अपने को गौरवान्वित महसूस कर रहे थे. शाम के वक्त कुछ समय बिता रहे थे, लेकिन उन्हें क्या मालूम कि फाउंटेन बहुत जल्द ही शोभा की वस्तु बन जाएगा या फिर तभी चलेगा, जब रेलवे के वरीय अधिकारी निरीक्षण को आएंगे. जी हां, यही हो रहा है धनबाद रेलवे स्टेशन के बाहर लगे फाउंटेन के साथ. राजस्व के मामले में धनबाद रेल मंडल तो आगे -आगे चलता है, लेकिन सुविधा के नाम पर उसके साथ क्या मजाक किया जाता है, इसका उदाहरण यह फाउंटेन है.
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स्केनर भी खराब
हम केवल फाउंटेन की ही बात नहीं करेंगे बल्कि स्टेशन के साउथ जोन की तरफ लगे स्केनर की भी स्थिति ठीक नहीं है. स्केनर के सामने जवानों की ड्यूटी को लगा दी गई है लेकिन कोई जाँच नहीं होती. यात्रियों के सामानों की कोई चेकिंग नहीं होती है. ऐसे में अगर कोई अप्रिय घटना हो जाए तो फिर उस समय फेंका फेंकी के सिवाय कुछ नहीं होगा. चलिए आगे बात करते हैं धनबाद रेलवे स्टेशन पर लगे ऑटोमेटिक वेंडिंग मशीन की. इस मशीन में लोग पैसे तो डालते हैं लेकिन टिकट नहीं निकलता है. अगल -बगल के लोगों का कहना है कि मशीन में सिर्फ प्रिंटिंग पेपर नहीं रहने की वजह से यह सब समस्याएं होती है. सवाल उठता है कि रेलवे के पास देखने और दुरुस्त करने के लिए लंबी फौज है.
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जिम्मेदार कौन ?
उसका औचित्य क्या है, अगर इन छोटी-छोटी बातों से यात्रियों को परेशानी हो रही है तो फिर इसके लिए जिम्मेदार कौन है ?. इस संबंध में धनबाद के समाजसेवी कुमार माधवेंद्र सिंह का कहना है कि होता ऐसा है कि जिस डीआरएम के कार्यकाल में योजना आती है, पूरा हो जाती है. इसके बाद आगे आने वाले डीआरएम इस पर ध्यान नहीं देते है. जबकि अगर सौदर्यीयकरण में एक बार शामिल हो गया है. फाउंटेन तो उसको मेंटेन करना चाहिए. वैसे ऑटोमेटिक वेंडिंग मशीन,स्केनर के संबंध में उन्होंने कहा कि मैं आज ही डीआरएम साहब को ट्वीट कर इसकी जानकारी दूंगा और उनसे आग्रह करूंगा कि इन व्यवस्थाओं को दुरुस्त कर दिया जाए ताकि यात्रियों को कोई परेशानी नहीं हो.
रिपोर्ट: शांभवी सिंह, धनबाद
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