पेचीदा हत्याकांडों में धनबाद पुलिस के हाथ खाली, इधर बिहार से खदेड़े जा रहे क्रिमिनल्स बन सकते हैं मुसीबत

    पेचीदा हत्याकांडों में धनबाद पुलिस के हाथ खाली, इधर बिहार से खदेड़े जा रहे क्रिमिनल्स बन सकते हैं मुसीबत

    धनबाद(DHANBAD): बिहार में नए डीजीपी के कार्यभार संभालने के बाद वहां माहौल बदल रहा है. अपराधी खदेड़े  जा रहे हैं. ऐसे में धनबाद पुलिस के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि वह बिहार के अपराधियों को कम से कम कोयलांचल में शरण लेने से रोकने की ठोस व्यवस्था बनाये. धनबाद के कई चर्चित कांडो में बिहार के अपराधियों के शामिल होने की बात सामने आती रही है. ऐसे में बिहार से भाग कर अपराधी कोयलांचल में आकर ठिकाना बनाने की कोशिश कर सकते हैं. वैसे भी कोलियरी के मजदूरों का इलाका उनके लिए सुरक्षित ठिकाने साबित होते रहे हैं. इधर, धनबाद में हत्याओं का ग्राफ पहले से ही बढ़ा हुआ है. एक आंकड़े के मुताबिक, एक 11 महीने में लगभग 70 हत्याएं हुई है. कई चर्चित हत्याकांडों में पुलिस के हाथ अभी भी खाली है. हालांकि कुछ हत्याकांडों का खुलासा तो पुलिस ने 24 से 48 घंटे में के भीतर ही कर ली है लेकिन कई चर्चित मामलो में पुलिस का अनुसंधान अभी भी अधूरा है. कई मामलों में पुलिस आरोपियों को जेल भेज कर निश्चिंत हो गई. 

    आरोपियों की गिरफ़्तारी से आगे नहीं बढ़ी रंजीत हत्याकांड की जां

    झरिया के रंजीत साव हत्याकांड को उदहारण के तौर पर गिना जा सकता है. पुलिस हत्या के असली कारणों और कांड के साजिशकर्ता को नहीं ढूंढ पाई है. रंजीत साव हत्याकांड में पुलिस 3 लोगों को जेल भेजकर निश्चिंत हो गई है. जबकि हत्या क्यों और किसने की अथवा करायी, इसका खुलासा नहीं हुआ है. झरिया के रंजीत साव हत्याकांड को अपराधियो का 'डेयरडेविल' एक्ट कहा जा सकता है. दिन-दोपहर में दुकान पर चढ़कर रंजीत साव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. हत्याकांड को लेकर काफी हंगामा भी हुआ था. झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता भी रंजीत साव के घर पहुंचे थे. उनकी छोटी बेटी ने मंत्री को खरी-खरी भी सुनाई थी. अभी हाल फिलहाल में दो हत्याकांड को लेकर धनबाद में दहशत बना हुआ है. जमीन कारोबारी अजय पासवान की बगुला बस्ती में गोली मारकर हत्या कर दी गई. 3 लोगों पर आरोप लगा है, लेकिन अभी गिरफ्तारी नहीं हुई है. इधर, नया बाजार के कोयला कारोबारी शहवाज सिद्धकी उर्फ़ बबलू की बैंक मोड़ थाना के विकास नगर में गोली लगने से मौत हुई. गोली जान कर मारी गई या अनजाने में चली, इसका अभी तक खुलासा नहीं हो पाया है. पिता ने पप्पू मंडल सहित कई लोगों पर संदेह व्यक्त किया है. जमीन कारोबारी अजय पासवान हत्याकांड में भी पुलिस के हाथ खाली हैं.

    जमीन कारोबारी अशोक पासवान हत्याकांड भी चुनौती

    जमीन कारोबारी अशोक पासवान के पार्टनर की भी 3 साल पहले कार्मिक नगर में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. यह तो कहा ही जा सकता है कि पुलिस कई मामलों का खुलासा भी करने में सफल भी हुई है. प्रेम प्रसंग अथवा लोकल अपराधियों द्वारा जो मर्डर किये गए हैं, उसका तो पुलिस खुलासा कर लेती है लेकिन बड़े और चर्चित हत्याकांड में पुलिस को सफलता नहीं मिलती. राजगंज के ज्योति रंजन हत्याकांड मैं पुलिस त्वरित कार्रवाई करते हुए हत्याकांड के आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था. इस हत्याकांड में उसका सगा भाई ही शामिल था, लेकिन जो केस उलझन पैदा कर रहे हैं, उनका खुलासा नहीं हो रहा है. रंगदारी के लिए धमकी मामलो में भी एक बाघमारा फायरिंग को छोड़ दे, तो विकासनगर के पप्पू मंडल के घर फायरिंग मामले का पुलिस खुलासा नहीं कर सकी है.

    रिपोर्ट: शांभवी के साथ संतोष की रिपोर्ट


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