धनबाद का आउटसोर्स कंपनी विवाद : पांच कोणों में फंस कर यह विवाद क्यों हो गया पेचीदा, अब आगे क्या?

    धनबाद का आउटसोर्स कंपनी विवाद : पांच कोणों में फंस कर यह विवाद क्यों हो गया पेचीदा, अब आगे क्या?

    धनबाद(DHANBAD):  लोदना  आउटसोर्सिंग में फेस का रास्ता काटे जाने के बाद उत्पन्न  विवाद में अब कई कोण  शामिल हो गए हैं.  एक तरफ आउटसोर्सिंग प्रबंधन  है, तो दूसरी ओर बीसीसीएल , तीसरा कोण  संयुक्त मोर्चा का बना है.   चौथा कोण  सिंह मेंशन का भी है.  एक्शन को लेकर पुलिस भी अब इसमें शामिल हो गई है.  मतलब यह  विवाद पांच कोणों में जकड़  गया है.  इस बीच पता चला है कि आउटसोर्सिंग प्रबंधन की शिकायत पर 10 संयुक्त मोर्चा के नेताओं पर प्राथमिकी  हुई है.  जबकि बीसीसीएल की ओर से नामजद  शिकायत नहीं की गई है. 

     यह  अलग बात है कि संयुक्त मोर्चा के नेताओं में चुन- चुन कर आउटसोर्सिंग मैनेजमेंट ने एफआईआर  की है.  इधर, जानकारी है कि पांच बीसीसीएलकर्मियों ने आउटसोर्सिंग कंपनी के खिलाफ अलग-अलग शिकायत की है.  फेस का रास्ता काटे जाने के बाद हुए विवाद में अब आगे क्या होगा, यह देखने वाली बात होगी।  क्योंकि इस मामले में प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से धनबाद के सांसद ढुल्लू महतो , सिंह मेंशन, पूर्व विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह के देवर, रामधीर  सिंह की पत्नी पूर्व मेयर  इंदु देवी सहित अन्य लोग शामिल हो गए हैं. 

     बलियापुर में गुरुवार को रोड जाम के दौरान संयुक्त मोर्चा के नेताओं ने सड़क जाम की थी.  इधर, गुरुवार को संजीव सिंह के साथ उनकी विधायक पत्नी और भाई भी पहुंचे।  संजीव सिंह का तेवर तल्ख़  था.  उन्होंने बहुत कुछ कहा, आउटसोर्सिंग कंपनी के संचालकों को यहां तक कह दिया कि झरिया के लोगों के साथ गुंडागर्दी कर धनबाद में जाकर राजनीति करने नहीं देंगे।  अगर मजदूरों का "बाप" बनने की कोशिश हुई तो बोरिया- बिस्तर समेटना होगा।  मारपीट में बीसीसीएल के अधिकारी और कर्मी  भी घायल हो गए थे.  घायलों से मिलने बीसीसीएल के सीएमडी तक केंद्रीय अस्पताल पहुंचे।  सांसद ढुल्लू महतो भी  पहुंचे, पूर्व विधायक संजीव सिंह भी गए, आसनी सिंह भी गई.  

    आउटसोर्सिंग विवाद  इतना बड़ा रूप लेगा  और इतना पेचीदा हो जाएगा, इसका अंदाज किसी को नहीं था.  आउटसोर्सिंग कंपनी को प्रोडक्शन नुकसान भी सहना पड़ा है.  मामला बीसीसीएल के टॉप मैनेजमेंट तक पहुंच गया है.  सीएमडी  तक को इसकी पूरी जानकारी मिल गई है.  दूसरी ओर संयुक्त मोर्चा के नेता कंपनी को  ब्लैक लिस्ट करने और देवप्रभा के निदेशकों को नामजक आरोपी बनाने की मांग कर रहे हैं.  संयुक्त मोर्चा के नेताओं का डिमांड है कि कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने का प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा जाए.  इस पर आगे क्या होगा, यह तो देखने वाली बात होगी।  लेकिन यह मामला इतना अधिक पेचीदा हो गया है कि अब आगे क्या रूप लेगा, इसके लिए समय की प्रतीक्षा करनी होगी। 

     वैसे, बीसीसीएल मैनेजमेंट का रुख कड़ा है.  कहा तो यही जाता है कि बीसीसीएल में संचालित आउटसोर्सिंग कंपनियों की अपनी समानांतर व्यवस्था चलती है और उस व्यवस्था में जो भी अड़ंगा  डालता है, वह परेशानी में पड़ जाता है.  ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि बीसीसीएल मैनेजमेंट का रुख  क्या होता है? वैसे भी शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद बीसीसीएल मैनेजमेंट पर उत्पादन और डिस्पैच का भारी दबाव है.  बीसीसीएल के कोयले के खरीदार लगातार घट रहे हौं.  मैनेजमेंट  इसको लेकर परेशान है और इस परिस्थिति से उबरने की  लगातार कोशिश कर रहा है.  इस बीच यह  एक बड़ा हंगामा खड़ा हो गया है. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो



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