धनबाद का पुराना बाजार-टोटो का आतंक कम जरूर है लेकिन खत्म नहीं हुआ, जानिए क्या कहते हैं दुकानदार

    धनबाद का पुराना बाजार-टोटो का आतंक कम जरूर है लेकिन खत्म नहीं हुआ, जानिए क्या कहते हैं दुकानदार

    धनबाद(DHANBAD): धनबाद का पुराना बाजार, यहां खीरा से लेकर हीरा तक मिलते हैं. बाजार में लगभग 2000 छोटी-बड़ी दुकाने हैं. सिंह दरवाजा नाम से प्रसिद्ध बाजार भी है. इस वजह से यहां आने-जाने वालों की भीड़ भी बहुत होती है. अगल-बगल के इलाके के लोग भी आने-जाने के लिए इसी रास्ते का प्रयोग करते हैं. लेकिन पिछले कई दिनों से यहां टोटो और दुकानदारों के बीच खींचतान चल रही है. दुकानदार कहते हैं कि टोटो वाले इस ढंग से गाड़ियां खड़ी करते है कि आना-जाना भी मुश्किल हो जाता है. दुकानों तक ग्राहक नहीं पहुंच पाते. पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है. इस बात को लेकर दो सप्ताह पहले दुकानदारों और टोटो चालकों में मारपीट हुई थी. 

    मारपीट में एक दुकानदार का फट गया था माथा

    इस मारपीट में एक दुकानदार का सिर फट गया था और उसे लगभग 10 टांके लगे थे. इसके बाद पुराना बाजार के व्यवसायियों ने रोड जाम किया था. आश्वासन मिला था कि इसका स्थाई समाधान निकाला जाएगा, स्थाई समाधान भी निकला, लेकिन राहत जितनी मिलनी चाहिए, नहीं मिल रही है. टोटो वालों को बाजार क्षेत्र में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है. लेकिन दुकानदारों का कहना है कि टोटो चालक तभी तक बाजार से बाहर रहते हैं, जब तक पुलिस के जवान मौजूद होते हैं. पीसीआर गाड़ी या टाइगर जवानों को देखकर गाड़ी हटा लेते हैं और उनके जाने के बाद फिर बाजार में गाड़ी खड़ी कर देते हैं. इस बात की पुष्टि कई दुकानदारों ने भी की है. 

    स्थाई पुलिस की तैनाती करने की हो रही मांग

    दुकानदारों की मांग है कि पुराना बाजार में स्थाई पुलिस की तैनाती की जाए ताकि टोटो चालक बाजार में प्रवेश नहीं कर सके. इधर, टोटो वाले भी अपनी रोजी-रोटी का हवाला देकर शनिवार को निगम के अधिकारियों से मिले और वह अपनी तरफ से एक रूट चार्ट हैंड ओवर किया. निगम के अधिकारी ने आश्वासन दिया है कि इस पर विचार किया जाएगा. बता दें कि धनबाद में पब्लिक ट्रांसपोर्ट नहीं होने के कारण लोगों को कहीं आने-जाने के लिए ऑटो और टोटो पर ही निर्भर रहना पड़ता है और इनकी मनमानी जगजाहिर है. यह किसी नियम कायदे-कानून को नहीं मानते. इस वजह से हमेशा टकराव की स्थिति बनी रहती है. ट्रैफिक की समस्या भी खड़ी होती है लेकिन इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकलता. निगम की सिटी बस चलाने की योजना अभी फाइलों में कैद है.  देखना है इसे कब लोगों को राहत मिलती है.

    रिपोर्ट : शाम्भवी सिंह के साथ संतोष


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