धनबाद निगम चुनाव : पार्टी का  बंधन भी टूटेगा तो परिवार वाले भी हो सकते है आमने-सामने, क्या बैठ रहा गणित-पढ़िए !

    धनबाद निगम चुनाव : पार्टी का  बंधन भी टूटेगा तो परिवार वाले भी हो सकते है आमने-सामने, क्या बैठ रहा गणित-पढ़िए !

    धनबाद (DHANBAD) : धनबाद में नगर निगम चुनाव की चर्चा बिहार विधानसभा चुनाव से कम नहीं है. धनबाद को तो "मिनी बिहार" कहा जाता है. छठ पर्व पर प्रत्याशी लोगों से संपर्क साधने की पूरी तैयारी कर रखी है. छठ घाटों पर भी उनकी सक्रियता दिखेगी. इस बार धनबाद नगर निगम का सीट सामान्य होगा. इस वजह से उम्मीदवारों की भरमार होगी. उम्मीदवारों की संख्या और उनके द्वारा किए गए कार्यों को भूल जाना भी निर्वतमान लोगो के लिए  एक समस्या हो सकती है. इधर, ठंड की शुरुआत हुई है लेकिन सियासी तापमान बढ़ा हुआ है. अभी तिथि की घोषणा नहीं हुई है. अभी तक निगम चुनाव लड़ने वाले चाहे मेयर का पद हो अथवा वार्ड पार्षद का, सभी साइलेंट मोड में थे, लेकिन अचानक रेस हो गए है. 

    राजनीतिक दलों के बीच भी गुणा-भाग शुरू हो गया है
     
    विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच भी गुणा भाग शुरू हो गया है.  कौन किसके समर्थन में है, इसकी भी चर्चा होने लगी है. जानकारी के अनुसार भाजपा में नगर निगम चुनाव को लेकर सर्वाधिक चर्चा है. पूर्व मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल तो सक्रिय हो ही गए हैं, सिंह मेंशन और रघुकुल घराने से भी कोई उम्मीदवार हो सकता है रंधीर सिंह की बहू आसनी सिंह भी चुनाव में उत्तर सकती है. चर्चा तेज है कि सांसद ढुल्लू महतो की पत्नी भी मेयर पद का चुनाव लड़ सकती है. कांग्रेस नेता शमशेर आलम भी सक्रिय है. छठ पर्व के बाद हलचल और तेज हो सकती है. झारखंड में एक बार फिर चुनावी महासंग्राम होगा. सभी दलों की अग्नि परीक्षा होगी. यह अलग बात है कि उम्मीदवार पार्टी के नहीं होते, लेकिन उन्हें किसी न किसी दल का समर्थन जरूर होता है. लंबी प्रतीक्षा के बाद झारखंड में निकाय चुनाव होने जा रहा है. सूत्रों के अनुसार धनबाद में पहली बार मेयर का पद अनारक्षित रहेगा.

    धनबाद में 2006 में निगम का गठन हुआ था. 2010 में पहली बार चुनाव हुआ
     
    धनबाद में 2006 में निगम का गठन हुआ था. 2010 में पहली बार चुनाव हुआ, तो मेयर का पद महिला के लिए आरक्षित था. 2015 में फिर चुनाव हुआ तो मेयर का पद ओबीसी के लिए आरक्षित रहा. पिछले 5 वर्षों से भी अधिक समय से झारखंड में निकाय चुनाव नहीं हुए है.राज्य सरकार ने झारखंड नगर पालिका निर्वाचन एवं चुनाव याचिका नियमावली 2012 में संशोधन किया है. राज्य के 9 नगर निगम को जनसंख्या के आधार पर ए और बी दो वर्गों में बांटा गया है. 10 लाख और इससे ऊपर की जनसंख्या वाले नगर निगम को ए और इससे कम जनसंख्या वाले नगर निगम को बी वर्ग में रखा गया है. ए वर्ग में रांची और धनबाद नगर निगम है. दरअसल, लंबे समय से झारखंड में निकाय चुनाव की प्रतीक्षा हो रही है. कई हैवीवेट उम्मीदवार इसकी प्रतीक्षा कर रहे है. 

    यहां-यहां होने है चुनाव-
    नगर निगम
    रांची नगर निगम धनबाद नगर निगम, देवघर नगर निगम, हज़ारीबाग नगर निगम, गिरिडीह नगर निगम, आदित्यपुर नगर निगम मानगो नगर निगम, मेदिनीपुर नगर निगम, चास नगर निगम. 

    नगर परिषद
    गुमला नगर परिषद, सिमडेगा नगर परिषद, लोहरदगा नगर परिषद, झुमरी तिलैया नगर परिषद, फुसरो नगर परिषद, चतरा नगर परिषद, रामगढ़ नगर परिषद, बिश्रामपुर नगर परिषद, गढ़वा नगर परिषद, चाईबासा नगर परिषद, चक्रधरपुर नगर परिषद, जुगसलाई नगर परिषद, कपाली नगर परिषद, मिहिजाम नगर परिषद, दुमका नगर परिषद, साहेबगंज नगर परिषद, पाकुड़ नगर परिषद, गोड्डा नगर परिषद, मधुपुर नगर परिषद, हुसैनाबाद नगर परिषद.

    नगर पंचायत
    बंशीधर नगर पंचायत,  मझिआंव नगर पंचायत, हुसैनाबाद नगर पंचायत, हरिहरगंज नगर पंचायत, छतरपुर नगर पंचायत, लातेहार नगर पंचायत, कोडरमा नगर पंचायत, डोमचांच नगर पंचायत, बड़कीसरैया नगर पंचायत, धनवार नगर पंचायत, महागामा नगर पंचायत, राजमहल नगर पंचायत, बरहरवा नगर पंचायत, बासुकीनाथ नगर पंचायत, जामताड़ा नगर पंचायत, बुंडू नगर पंचायत, खूंटी नगर पंचायत, सरायकेला नगर पंचायत, चाकुलिया नगर पंचायत.


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