Dhanbad : अर्पणा-अरूप के विवाद में सांसद ढुल्लू महतो की एंट्री, दे डाली यह चुनौती 

    Dhanbad : अर्पणा-अरूप के विवाद में सांसद ढुल्लू महतो की एंट्री, दे डाली यह चुनौती 

    धनबाद(DHANBAD) : धनबाद के निरसा में उपरी  तौर पर शांति तो दिख रही है लेकिन भीतर ही भीतर निरसा में "राजनीतिक आग" सुलग रही है. चुनाव के बाद निरसा में माले और भाजपा के बीच एक सप्ताह पहले टकराहट हुई थी. यह टकराहट गोपीनाथपुर कोलारी में आउटसोर्स कंपनी को लेकर हुई थी. विवाद तो तीखा हुआ था. आरोप लगा कि माले समर्थित यूनियन के अर्ध निर्मित पंडाल को जला दिया गया. मारपीट भी हुई थी. माले के विधायक अरूप चटर्जी फायरिंग तक के आरोप लगाए थे. इस बीच रविवार की शाम धनबाद के सांसद ढुल्लू महतो भी निरसा पहुंचे. उन्होंने प्रशासन को चुनौती दी कि निरसा पुलिस ग्रामीणों को डराने-धमकाने का काम नहीं करे. राज्य सरकार को निरसा विधायक के क्रियाकलापों पर संज्ञान लेना चाहिए.

    सांसद ने कहा-निरसा विधायक को पुलिस के भरोसे राजनीति करने नहीं दी जाएगी
     
    निरसा विधायक को पुलिस के भरोसे राजनीति करने नहीं दी जाएगी. उन्होंने चेतावनी दी कि जिला प्रशासन अगर जल्द से जल्द आउटसोर्सिंग कंपनी जीसीपीएल का काम शुरू नहीं करवाया, तो जीटी रोड जाम कर दिया जाएगा. उन्होंने निरसा  विधायक अरूप  चटर्जी को आड़े हाथों लिया. इधर, स्थानीय युवकों को नियोजन समेत 9 सूत्री मांगों को लेकर माले समर्थित यूनियन का धरना आठवें दिन भी जारी रहा. विधायक अरूप चटर्जी ने कहा कि गोपीनाथपुर ओसीपी प्रबंधन केवल दो लोगों को रखकर यहां गुंडागर्दी करना चाह रहा है. जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा. निरसा  की पूर्व विधायक अपर्णा सेनगुप्ता को निशाने पर लिया. 

    2024 में माले  ने धनबाद जिले में भाजपा के किले को दरका दिया है
     
    दरअसल, 2024 में माले  ने धनबाद जिले में भाजपा के किले को दरका दिया है. यह अलग बात है कि निरसा और सिंदरी दोनों विधानसभा सीट पर कम अंतर से ही सही, लेकिन भाजपा की हार हुई है. दोनों जगहों पर माले के विधायक  विधायक चुनाव जीते है. यह बात भी सच है कि पहले भी निरसा में लाल झंडे में ही टकराहट होती थी. अपर्णा सेनगुप्ता के भाजपा में जाने के बाद भी टकराहट होती रही है. अपर्णा सेन गुप्ता पहले फॉरवर्ड ब्लॉक में थी. उसे समय भी एके राय की पार्टी (मासस) से उनकी टकराहट होती थी. अब मासस का माले में विलय हो गया है. 2024 का विधानसभा चुनाव हारने के बाद निश्चित रूप से विधायक अरूप  चटर्जी का "अपर हैंड" हुआ  है.  रोजगार के इस मुद्दे पर भाजपा और माले आमने-सामने है. भाजपा समर्थित गोपीनाथपुर कोलियरी बेरोजगार संघर्ष मोर्चा की ओर से आउटसोर्स कंपनी जीसी पीएल का काम शुरू कराने  के लिए आंदोलन किया जा रहा है तो माले सामर्थी  यूनियन रोजगार की मांग कर रही है. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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